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    ज्ञानवापी प्रकरण : राम मंदिर केस की तर्ज पर हो HC में हो ज्ञानवापी मामले की सुनवाई..सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

    वाराणसी कोर्ट में श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े 3 मामलों की सुनवाई शनिवार दोपहर जिला जज कोर्ट में हुई। जिला जज संजीव पांडे ने पांच वादिनी महिलाओं के केस में समेकित 7 केस समेत 8 याचिकाओं का शेड्यूल भी जाना। वकीलों ने ज्ञानवापी सर्वे में मुस्लिम पक्ष की ओर से आपत्ति दाखिल नहीं करने पर भी सवाल उठाए।

    वादिनी की ओर से ज्ञानवापी मूलवाद को जिला जज कोर्ट में चल रहे केसों के साथ समायोजित करने की अपील की गई। कहा कि मूलवाद 1991 निचली अदालत में प्रचलित है, जब एक ही नेचर के केस हैं तो एक साथ ही सुनवाई होनी चाहिए। राम मंदिर केस की तर्ज पर ज्ञानवापी मामले की सुनवाई की मांग की है।

    जिला जज इस केस में अहम याचिकाओं पर वकीलों का पक्ष सुना, केस को निचली अदालत से स्थानांतरित करने के लिए वाद मित्र विजयशंकर रस्तोगी को नोटिस भी भेजा है। ज्ञानवापी मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन, तहखाने की मरम्मत और मुस्लिम नमाजियों को तहखाने की छत पर रोकने समेत प्रमुख मांगों पर दोनों पक्ष जिरह हुई।

    शनिवार को जिला जज की कोर्ट में ज्ञानवापी तहखाने की मरम्मत और बंद तहखानों के सर्वेक्षण की राखी सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की याचिका भी सुनी गई। हिन्दू पक्ष के वकील ने कोर्ट से दक्षिणी-तहखाने में चल रही पूजा वाले तलगृह के जर्जर छत व बीम के मरम्मत की अनुमति मांगी है।

    काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कोर्ट के माध्यम से अनुरोध किया गया कि खंभे और छत की मरम्मत कराई जाए ताकि तहखाने में कोई दुर्घटना या अनहोनी ना हो। हालांकि, सुनवाई पर मुस्लिम पक्ष ने मरम्मत पर आपत्ति जाहिर की, दोनों पक्ष के वकीलों में बहस हुई।

    दायर याचिका में ज्ञानवापी परिसर में बंद तहखानों के एएसआई सर्वे के लिए भी कहा गया है। दावा किया गया कि ज्ञानवापी मस्जिद के दक्षिण की ओर एस-1 और उत्तर की ओर एन-1 सहित अन्य तहखानों को एएसआई के प्रारंभिक सर्वेक्षण के तहत कवर नहीं किया जा सका, क्योंकि वे पत्थर से बंद हैं।

    अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने कोर्ट में दलील दी कि ज्ञानवापी से जुड़े सेम नेचर के केस दूसरी अदालतों में चल रहे हैं, वहां आने वाले फैसले जिला जज कोर्ट में चल रहे केस को प्रभावित करेंगे। पहले ही सात केस को एक साथ मर्ज किया जा चुका है इसलिए सीनियर डिवीजन में प्रचलित मूलवाद 1991 को जिला जज कोर्ट से मर्ज कर दिया जाए।

    उनका अवरोध हटाकर टीम को अंदर सर्वे की अनुमति प्रदान की जाए। राखी सिंह की ओर से दायर याचिका में जिसमें अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी और काउंटर की ओर से आपत्ति दाखिल कर चुका है। वादी महिलाओं में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक हैं। इनके वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी और सुधीर त्रिपाठी भी जिरह में पहुंचे। जिला जज 19 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेंगे।

    बंद तहखानों का सर्वे और मरम्मत की याचिकाएं

    राखी सिंह के वकील सौरभ तिवारी ने कोर्ट में ज्ञानवापी में बंद तहखानों के सर्वे को जरूरी बताया है। उनकी दलील है कि ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक चरित्र को निर्धारित करने के लिए ASI के लिए बंद तहखानों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करना बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल ज्ञानवापी से संबंधित दो मामलों में पारित आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी एएसआई सर्वेक्षण को रेखांकित किया था।

    इसी मामले में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने 8 मार्च को जिला न्यायाधीश की अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर किया था। जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद के दक्षिणी तहखाने की छत की आवश्यक मरम्मत की अनुमति मांगी गई थी।

    इस आवेदन के माध्यम से मंदिर ट्रस्ट के सीईओ ने नमाज अदा करने के लिए दक्षिणी तहखाने की छत पर मुसलमानों के इकट्ठा होने पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया। क्योंकि तहखाने की स्थिति पुजारियों के लिए जीवन का खतरा पैदा कर रही है, इस पर भी जिला जज 19 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे।

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