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    मीट-मांस की दुकानों को शहर से बाहर करने की चर्चा पर नगर निगम का यू-टर्न, कांग्रेस नेताओं के दावों को मिली पुष्टि

    • मोहम्मद रिजवान
    वाराणसी :- शहर में मीट-मांस की दुकानों को नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं के बीच नगर निगम प्रशासन ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। निगम ने साफ किया है कि कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अंसारी की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था, जिसमें मांस और मछली की दुकानों को काशी शहर से बाहर भेजने की मांग की गई हो।

    कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि शहर से मीट-मांस की दुकानों को हटाने का प्रस्ताव कांग्रेस पार्षद दल की ओर से आया था। इस दावे पर गुलशन अंसारी ने शुरुआत से ही आपत्ति जताते हुए इसे भ्रामक बताया था। उन्होंने नगर निगम और महापौर से मांग की थी कि यदि उनके नाम से कोई प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाए।

    गुलशन अंसारी का कहना था कि बिना किसी दस्तावेजी आधार के उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि काशी की सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी संस्कृति को विवादों में घसीटना उचित नहीं है।
    विवाद बढ़ने और लगातार उठ रहे सवालों के बाद नगर निगम प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्षद दल की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया था। निगम के इस स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे अपनी बात की पुष्टि और सत्य की जीत बताया।

    नगर निगम के स्पष्टीकरण का कांग्रेस ने किया स्वागत

    महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही तथ्य सामने रखने का काम किया और अब नगर निगम द्वारा वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने से सच्चाई जनता के सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में तथ्यों को स्वीकार करना सकारात्मक कदम है और नगर निगम का यह रुख स्वागत योग्य है।

    राघवेंद्र चौबे ने कहा कि अब यह साफ हो चुका है कि गुलशन अंसारी द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था, इसलिए इस मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रांतियों और अफवाहों को भी समाप्त हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समाज में सौहार्द और भाईचारे की राजनीति में विश्वास करती है तथा काशी की साझा सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

    वहीं, गुलशन अंसारी ने कहा कि उन्होंने केवल अपने नाम से जोड़े जा रहे कथित प्रस्ताव का प्रमाण मांगा था। अब नगर निगम ने स्वयं स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव मौजूद ही नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में बिना तथ्यों के किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की छवि खराब करने का प्रयास नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि मीट-मांस कारोबार से जुड़े किसी भी निर्णय में व्यापारियों, श्रमिकों और इस व्यवसाय पर निर्भर हजारों परिवारों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, नीति निर्माण के दौरान आजीविका, सामाजिक संतुलन और आर्थिक प्रभाव जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

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