वाराणसी गंज शहीदा मस्जिद पर छिड़ा नया विवाद, डीएम से मिले अंजुमन इंतेजामिया के पदाधिकारी
वाराणसी :- काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के दौरान गंज शहीदा मस्जिद को हटाए जाने के रेलवे प्रशासन के नोटिस के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मस्जिद प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों और शहर मुफ्ती ने शुक्रवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने तथा रेलवे और प्रशासन के स्तर पर समाधान निकालने की मांग की।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से कहा कि गंज शहीदा मस्जिद क्षेत्र की एक प्राचीन धार्मिक धरोहर और हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले सभी पक्षों को साथ लेकर उचित समाधान निकाला जाना चाहिए।
मस्जिद रेलवे से पहले की, अवैध कैसे?शहर मुफ्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने दावा किया कि गंज शहीदा मस्जिद का इतिहास रेलवे के अस्तित्व से भी पुराना है। उनके अनुसार मस्जिद का उल्लेख पुराने बंदोबस्ती अभिलेखों और नक्शों में दर्ज है, जो इसके ऐतिहासिक अस्तित्व का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिद पुराने सरकारी अभिलेखों में दर्ज है तो उसे अवैध निर्माण करार देना उचित नहीं है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि रेलवे अधिकारियों से वार्ता कर ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे विकास कार्य भी प्रभावित न हो और धार्मिक स्थल की गरिमा भी बनी रहे।
डीएम ने समाधान का दिया आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के अनुसार जिलाधिकारी ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए रेलवे प्रशासन से बातचीत कर समाधान तलाशने का आश्वासन दिया है। साथ ही मस्जिद पक्ष ने अनुरोध किया कि बातचीत और समाधान निकलने तक किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।
रेलवे ने 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा
उधर रेलवे प्रशासन की ओर से मस्जिद परिसर पर लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि काशी स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार के समीप स्थित यह निर्माण रेलवे भूमि पर है और स्टेशन के पुनर्विकास कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा है। नोटिस में संबंधित पक्ष को 20 जून 2026 तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है।
रेलवे का कहना है कि इस संबंध में चल रहा एक पुराना वाद अदालत द्वारा अगस्त 2024 में खारिज किया जा चुका है, जिसके बाद भूमि को खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
नोटिस की वैधता पर उठाए सवाल
मस्जिद प्रबंधन से जुड़े एस.एम. यासीन ने रेलवे के नोटिस पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नोटिस सीधे मस्जिद की दीवार पर चस्पा कर दिया गया, जबकि किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी विधिवत प्रति नहीं सौंपी गई। उनका कहना है कि नोटिस पर हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर भी स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस मुकदमे का उल्लेख नोटिस में किया गया है, उसका मस्जिद से सीधा संबंध नहीं था और वह अलग भूमि विवाद से जुड़ा मामला था।
पुराने दस्तावेजों का हवाला
मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि उनके पास ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज और बंदोबस्ती नक्शे मौजूद हैं जिनमें गंज शहीदा मस्जिद का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। प्रबंधन का दावा है कि ये अभिलेख साबित करते हैं कि मस्जिद रेलवे स्टेशन के निर्माण से पहले से अस्तित्व में है।
फिलहाल काशी स्टेशन के पुनर्विकास कार्य और गंज शहीदा मस्जिद को लेकर रेलवे तथा मस्जिद प्रबंधन के बीच विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और रेलवे के बीच होने वाली संभावित वार्ता तथा उसके परिणाम पर टिकी हैं।


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