फिल्म 'जामताड़ा' से मिला आइडिया, YouTube से सीखा साइबर फ्रॉड; वाराणसी में ठगी की साजिश बनी हत्या की वजह
वाराणसी :- कमिश्नरेट वाराणसी के साइबर अपराध के इतिहास में पहली बार साइबर ठगी से जुड़ा मामला हत्या तक पहुंच गया। रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर में किराना व्यापारी जितेंद्र पटेल की हत्या के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने मुठभेड़ के बाद पांच युवकों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों की उम्र 20 से 23 वर्ष के बीच है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने कोविड काल के दौरान फिल्म 'जामताड़ा' और YouTube वीडियो देखकर साइबर फ्रॉड के तरीके सीखे और फिर अपना गैंग बना लिया।घर से शुरू किया साइबर फ्रॉड, फिर तैयार कर ली गैंग
डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार के मुताबिक गैंग का सरगना आयुष पटेल (21) पहले अपने घर से साइबर ठगी का प्रयोग करता था। सफलता मिलने के बाद उसने अपने साथियों गोलू पटेल, अमन सेठ, मनीष सिंह और जियांशु पटेल को साथ लेकर गिरोह बना लिया। सभी आरोपी TVS रोनिन बाइक से अलग-अलग शहरों में घूमकर वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे।Paytm एजेंट बनकर दुकानदारों को बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार आयुष पहले Paytm कंपनी में काम कर चुका था। इसी अनुभव का फायदा उठाकर वह खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताता था। आरोपी दुकानदारों को KYC अपडेट कराने, साउंड बॉक्स लगाने और बिजनेस अकाउंट पर लगने वाले शुल्क कम कराने का झांसा देते थे। इस बहाने मोबाइल और सिम कार्ड तक पहुंच बनाकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे।
बैंक खाते में लाखों रुपये देखकर बना हत्या का प्लान
अवलेशपुर के किराना व्यापारी जितेंद्र पटेल के यहां भी आरोपी इसी योजना के तहत पहुंचे थे। जांच के दौरान उन्हें पता चला कि व्यापारी के खाते में करीब 26 लाख रुपये जमा हैं और हाल ही में लगभग 30 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। इसके बाद आरोपियों ने व्यापारी का मोबाइल हथियाकर खाते से रकम निकालने की योजना बनाई। जब यह आसान नहीं लगा तो हत्या की साजिश रच डाली।
बिहार से मंगवाई पिस्टल, रेकी के बाद मारी गोली
पुलिस के मुताबिक गैंग के एक सदस्य ने बिहार से अवैध पिस्टल की व्यवस्था की। कई दिनों तक रेकी करने के बाद आरोपियों ने व्यापारी को घर लौटते समय रास्ते में गोली मार दी। गोली लगने के बावजूद जितेंद्र पटेल किसी तरह घर पहुंच गए, जहां परिजनों को घटना की जानकारी हुई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आरोपी मोबाइल लूटने में सफल नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए।20 दिन की जांच, 2 हजार CCTV कैमरे खंगालने के बाद खुला राज
घटना के खुलासे के लिए पुलिस की विशेष टीम गठित की गई। करीब 50 पुलिसकर्मियों ने 20 दिनों तक वाराणसी, मिर्जापुर और चंदौली के लगभग 2 हजार CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में TVS रोनिन बाइक और एक बैकअप कार की पहचान हुई। कार के आधार पर तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिन्होंने पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया।
मुठभेड़ में दो आरोपी घायल, पांचों गिरफ्तार
अन्य दो आरोपियों की तलाश में पुलिस ने घेराबंदी की। खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 1.78 लाख रुपये नकद, 10 Paytm साउंड बॉक्स, 18 मोबाइल फोन, 29 डेबिट कार्ड, 116 QR कोड, 15 प्लास्टिक QR स्टैंड, एक लैपटॉप, 9 सिम कार्ड, एक पिस्टल, एक तमंचा, तीन जिंदा कारतूस तथा साइबर ठगी से जुड़े कई दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए हैं।
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को संबंधित धाराओं में जेल भेज दिया गया है और गिरोह के नेटवर्क की आगे भी जांच की जा रही है।




No comments