छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार, जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग पर होगी कार्रवाई
छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि जांच में यह सामने आता है कि पुलिस ने निर्धारित नियमों से हटकर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। अदालत के अनुसार, जांच केवल प्रदर्शनकारियों के आरोपों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पुलिस और प्रशासन की भूमिका की भी समान रूप से समीक्षा की जाएगी।
विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था में संतुलन जरूरी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताने और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का अधिकार सुरक्षित है। साथ ही यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अदालत ने वर्ष 2018 में जारी पुलिस कार्रवाई संबंधी दिशा-निर्देशों की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई। कोर्ट का कहना था कि बदलते समय और तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप यह देखा जाना चाहिए कि मौजूदा नियम पर्याप्त हैं या उनमें संशोधन की जरूरत है।
नाबालिग प्रदर्शनकारियों को अंतरिम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ कानून के प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य, जैसे सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरी हो सके।
सरकार ने पुलिस कार्रवाई का किया बचाव
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम में किस पक्ष की क्या जिम्मेदारी रही। अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी पक्ष के प्रति पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।
आठ राज्यों से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 3 अगस्त को
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सहित आठ राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही निर्देश दिया कि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कठोर कार्रवाई से बचा जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जिसमें जांच की प्रगति और राज्यों के जवाब पर विचार किया जाएगा।
अंतरिम आदेश के प्रमुख बिंदु
- -बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों की रिहाई।
- पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और जरूरत से अधिक बल प्रयोग की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश।
- सीसीटीवी, ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा समेत सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश।
- दिल्ली सहित आठ राज्यों से जवाब तलब, निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर फिलहाल सख्त कार्रवाई से परहेज।

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