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    राम मंदिर ट्रस्ट में CEO बनने की होड़, दो दिन में उमड़े 1000 से अधिक दावेदार; पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने भी ठोकी दावेदारी

    अयोध्या :- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला है। महज 48 घंटे के भीतर ट्रस्ट को 1000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। बड़ी संख्या में आए आवेदनों ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को चर्चा का विषय बना दिया है। इस पद के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी आवेदन किया है।

    पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने किया आवेदन

    पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर भी CEO पद की दौड़ में शामिल हो गए हैं। हालांकि, अंतिम चयन किसका होगा, इसका फैसला चयन समिति की जांच और ट्रस्ट बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा। समिति सभी आवेदनों की समीक्षा कर अधिकतम तीन नाम अंतिम विचार के लिए बोर्ड को भेजेगी।

    दो दिन में रिकॉर्ड आवेदन

    ट्रस्ट अधिकारियों के अनुसार, आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के पहले 48 घंटे में ही 1000 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। अंतिम तिथि के बाद सभी आवेदनों की विस्तृत जांच की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कुछ उम्मीदवारों को व्यक्तिगत बातचीत या इंटरैक्शन के लिए भी बुलाया जा सकता है।

    करीब एक महीने में पूरा होगा चयन

    चयन समिति का प्रयास है कि आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के लगभग 30 दिनों के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद समिति तीन तक योग्य उम्मीदवारों के नाम ट्रस्ट बोर्ड के समक्ष रखेगी, जहां से नए CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।

    22 जुलाई की बैठक पर सबकी नजर

    ट्रस्ट की प्रस्तावित 22 जुलाई की बैठक को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में चयन प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा होगी। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ती है तो नए CEO की नियुक्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।

    इन मापदंडों पर होगी उम्मीदवारों की परख

    CEO पद के लिए उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनके प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, कार्यशैली, ईमानदारी, बड़े संस्थानों के संचालन का अनुभव और प्रबंधन कौशल के आधार पर किया जाएगा। इस पद के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सेवानिवृत्ति के करीब अधिकारी और निजी क्षेत्र के अनुभवी पेशेवर भी आवेदन करने के पात्र हैं।

    दान प्रकरण की जांच भी जारी

    उधर, राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच भी लगातार जारी है। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान संग्रह और हस्तांतरण की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और सिस्टम की किन कमजोरियों का फायदा उठाया गया।


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