मानसून में बढ़ा पिंक आई का खतरा, आंखें लाल होने के साथ पानी-खुजली को न करें नजरअंदाज; ऐसे करें बचाव
बारिश के मौसम में आंखों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों कंजंक्टिवाइटिस यानी पिंक आई के मामले भी सामने आ सकते हैं। आंखों में लालिमा, पानी आना, खुजली और जलन जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खासकर ऑफिस, स्कूल या अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे तक आसानी से पहुंच सकता है।
मानसून के दौरान नमी और लोगों के बीच बढ़ता संपर्क संक्रमण फैलने की परिस्थितियां बना सकता है। ऑफिस में एक ही टेबल, कंप्यूटर, कीबोर्ड, माउस, फोन, प्रिंटर और अन्य सामान्य वस्तुओं का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या दूषित सतह को छूने के बाद आंखों को छूने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
क्या होता है पिंक आई?
पिंक आई को चिकित्सकीय भाषा में कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। इसमें आंख के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी हिस्से को ढकने वाली पतली झिल्ली यानी कंजंक्टाइवा में सूजन या संक्रमण हो जाता है। इसके कारण आंखें लाल या गुलाबी नजर आने लगती हैं।
कंजंक्टिवाइटिस वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के अलावा एलर्जी, धूल और अन्य कारणों से भी हो सकता है। वायरल और बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस संक्रामक हो सकते हैं, जबकि एलर्जी से होने वाला कंजंक्टिवाइटिस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
कैसे फैल सकता है संक्रमण?
पिंक आई से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या उसकी इस्तेमाल की हुई चीजों को छूने के बाद आंखों को छूने से संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा एक ही तौलिया या हैंड टॉवल का इस्तेमाल करना, आई मेकअप, आई ड्रॉप्स, कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मा साझा करना भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है।
ऑफिस जैसी बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमित व्यक्ति के साथ लगातार संपर्क में रहने से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
कंजंक्टिवाइटिस होने पर आंखों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- आंखों का लाल या गुलाबी होना
- आंखों से बार-बार पानी आना
- आंखों में खुजली और जलन होना
- आंख में कुछ चुभने या फंसे होने जैसा महसूस होना
- पलकों के आसपास सूजन
- आंखों से चिपचिपा या असामान्य डिस्चार्ज निकलना
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में आंखों से डिस्चार्ज अधिक हो सकता है और सुबह उठने पर पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं।
ऑफिस में कैसे रखें आंखों को सुरक्षित?
पिंक आई से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं और आंखों को बार-बार छूने से बचें। कीबोर्ड, माउस, मोबाइल फोन, टेबल और अन्य साझा सतहों के इस्तेमाल के बाद हाथ साफ करना बेहतर है।
अपना तौलिया, रूमाल, आई मेकअप, आई ड्रॉप्स, कॉन्टैक्ट लेंस और आंखों से जुड़ी अन्य निजी वस्तुएं किसी के साथ साझा न करें।
अगर किसी व्यक्ति में पिंक आई के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसके बेहद करीब जाने से बचें और व्यक्तिगत सामान साझा न करें। संक्रमित होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।
बिना सलाह के आई ड्रॉप न डालें
आंखों में लालिमा या जलन होने पर खुद से कोई आई ड्रॉप या दवा इस्तेमाल करने से बचें। खासकर स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नुकसानदायक हो सकता है।
अगर आंखों में तेज दर्द, रोशनी देखने में परेशानी, नजर धुंधली होना या आंखों में गंभीर सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो देरी किए बिना आंखों के डॉक्टर से संपर्क करें।
मानसून में थोड़ी सी सावधानी और साफ-सफाई की आदत आंखों को संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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