सीजफायर की नाजुक स्थिति के बीच शुरू हुआ पवित्र हज, भारत समेत 150 देशों के मुसलमान पहुंचे मक्का
मक्का-मीना में गूंज रही "लब्बैक" की सदाएं
सऊदी अरब की पवित्र सरज़मीं पर हज 2026 की रस्में शुरू हो चुकी हैं। भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आए 15 लाख से अधिक मुस्लिम श्रद्धालु इन दिनों मक्का और मीना में मौजूद हैं और हज के अरकान अदा कर रहे हैं। इस्लाम के पांच स्तंभों में शामिल हज को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह और आध्यात्मिक भावनाएं देखने को मिल रही हैंइस वर्ष का हज वैश्विक परिस्थितियों के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मध्य पूर्व में हाल के तनाव और संघर्ष के बाद बने युद्धविराम के माहौल में लाखों मुसलमान अमन, स्थिरता और मानवता की भलाई के लिए दुआएं कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि मौजूदा हालात में हज केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि विश्व शांति की कामना का भी प्रतीक बन गया है।
भारत, इंडोनेशिया, मिस्र समेत अनेक देशों से पहुंचे हाजी पवित्र स्थलों पर इबादत में मशगूल हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्षों के इंतजार, बचत और तैयारियों के बाद उन्हें यह अवसर मिला है, जो उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक है।
मक्का में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच सऊदी प्रशासन ने हाजियों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जगह-जगह पेयजल, शीतल फुहारों, छायादार स्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक भी लगातार श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे हुए हैं।
हज की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी एकता और समानता की भावना में दिखाई देती है। दुनिया के अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए लाखों मुसलमान एक ही वेशभूषा में एक साथ इबादत करते हैं, जहां अमीरी-गरीबी, रंग-भेद और सामाजिक भिन्नताओं का कोई महत्व नहीं रह जाता।
ऐसे समय में जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, हज 2026 लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक शक्ति, भाईचारे और शांति का संदेश लेकर आया है।

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