ठेका कर्मचारियों से ₹35 हजार की कथित उगाही पर घिरा वाराणसी एयरपोर्ट प्रशासन, संसद में उठ सकता है मामला
- मोहम्मद रिजवान
बाबतपुर (वाराणसी) लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर पर आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के नाम पर कर्मचारियों के शोषण और कथित भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। एयरपोर्ट पर सेवाएं देने वाली एक निजी कंपनी के ठेकेदारों पर कर्मचारियों से नौकरी बचाने के एवज में प्रति व्यक्ति ₹35 हजार की मांग करने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
पीड़ित कर्मचारियों ने मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र की सपा सांसद Priya Saroj से मुलाकात कर उन्हें शिकायती पत्र सौंपा और न्याय की मांग की। कर्मचारियों का आरोप है कि टेंडर बदलने के बाद पुराने कर्मचारियों पर नौकरी जारी रखने के लिए पैसों का दबाव बनाया जा रहा है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई
कर्मचारियों ने केवल मौखिक शिकायत ही नहीं की, बल्कि कथित वसूली और धमकी से जुड़े कई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सांसद को साक्ष्य के तौर पर सौंपे हैं। कर्मचारियों का दावा है कि इन रिकॉर्डिंग में रुपये मांगने और रकम न देने पर नौकरी से हटाने की धमकियां स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती हैं।
टेंडर बदलते ही शुरू हुई कथित वसूली
शिकायत पत्र के अनुसार, पहले एयरपोर्ट पर कार्यरत कर्मचारी ‘जेसीसी इलेक्ट्रिकल कंपनी’ के तहत काम कर रहे थे। हाल ही में कंपनी का टेंडर समाप्त होने के बाद नया टेंडर ‘एसएन इलेक्ट्रिकल कंपनी’ को मिला। आरोप है कि नई कंपनी के कार्यभार संभालते ही पुराने कर्मचारियों को बनाए रखने के बदले ₹35 हजार प्रति कर्मचारी की मांग शुरू कर दी गई।
कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग इतनी बड़ी रकम देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें नौकरी से बाहर करने की धमकी दी जा रही है। इससे कई परिवारों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।
संसद में गूँजेगा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद Priya Saroj ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि वह इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में लोकसभा में उठाएंगी और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगी।
एयरपोर्ट निदेशक ने जताई अनभिज्ञता
जब इस संबंध में वाराणसी एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार किया। हालांकि एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और वीआईपी क्षेत्र में इस तरह की कथित अवैध वसूली के आरोपों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सांसद के हस्तक्षेप और शिकायत के बाद कर्मचारियों को न्याय मिलता है या नहीं, और क्या इस कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हो पाती है।

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