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    निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन तेज, वाराणसी और गाजीपुर में हुई जनजागरण सभाएं


    वाराणसी :- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में वाराणसी और गाजीपुर में जोरदार जनजागरण सभाएं आयोजित की गईं। वाराणसी के भेलूपुर स्थित कार्यालय में आयोजित सभा में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बिजली कर्मियों पर हो रही कार्रवाईयों को लेकर गहरा आक्रोश जताया।

    सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मचारियों के खिलाफ की गई दमनात्मक कार्यवाहियां वापस न लिए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।

    संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था प्रबंधन की नाकामी के कारण चरमराने लगी है। इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के बजाय कर्मचारियों पर दबाव और उत्पीड़न बढ़ाया जा रहा है। समिति के अनुसार, वर्षों से कम वेतन पर कार्य कर रहे संविदाकर्मियों को हटाया जा रहा है, जबकि नियमित पद भी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर समाप्त किए जा रहे हैं।

    पदाधिकारियों ने कहा कि संविदाकर्मियों से 12 से 14 घंटे तक लगातार कार्य लिया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी और अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना पड़ रहा है।

    संघर्ष समिति ने मांग की कि बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रबंधन तत्काल संघर्ष समिति से वार्ता करे तथा टकराव की नीति छोड़कर कर्मचारियों को विश्वास में लेकर कार्ययोजना तैयार करे।

    सभा को ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, माया शंकर तिवारी, मोहम्मद वसीम, एस.के. सिंह, के.के. ओझा, कृष्णा सिंह, राजेश सिंह, विवेक सिंह, मनोज यादव और नवदीप सैनी सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया, अंकुर पाण्डेय मीडिया सचिव/प्रभारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश, वाराणसी

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