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    भीषण गर्मी की परवाह नहीं, हक की लड़ाई जारी: एमडी कार्यालय पर बिजलीकर्मियों का प्रदर्शन


    वाराणसी :- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले पूर्वांचल के बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं, जूनियर इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और संविदा कर्मियों ने सोमवार को भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण और ऊर्जा प्रबंधन की कथित दमनात्मक नीतियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।
    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है। स्थानांतरण, निलंबन, चार्जशीट, वेतन रोकने और मानसिक दबाव बनाकर कर्मचारियों को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार और ऊर्जा प्रबंधन बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहे हैं। उनका दावा है कि निजीकरण न केवल बिजलीकर्मियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
    वक्ताओं ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने मांग की कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजलीकर्मियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य अनुशासनात्मक और दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए।
    संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का आरोप है कि संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेने वाले पदाधिकारियों और कर्मचारियों को निशाना बनाकर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की जा रही है।

    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह अलोकतांत्रिक और कर्मचारी विरोधी है।

    बिजलीकर्मियों ने फेशियल अटेंडेंस के आधार पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी प्रक्रियाओं को भी तत्काल बंद करने की मांग की।

    इसके अलावा, ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों से वसूली किए जाने संबंधी आदेश को भी अवैधानिक बताते हुए वापस लेने की मांग उठाई गई।

    वक्ताओं ने कहा कि बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात कार्य करते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    सभा को ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर, ई. मायाशंकर तिवारी, महेंद्र राय, ओ.पी. सिंह, प्रेमनाथ राय, चंद्रभूषण उपाध्याय, सूर्यदेव पांडेय, अखिलेश शर्मा, दलसिंगार यादव, निखिलेश सिंह, ई. एस.के. सिंह, रामकुमार झा, गिरीश यादव, धर्मेंद्र यादव, कृष्णा सिंह, सुरेश सिंह, वीरेंद्र सिंह, उपेंद्र चौरसिया, दीपक पटेल, सुनील प्रजापति, चंद्रजीत यादव, नवीन सिंह और मिथिलेश यादव समेत कई नेताओं ने संबोधित किया।

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