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    पुलिस ने ध्वस्त किया फर्जीवाड़े का नेटवर्क, दो फर्जी जमानतदार गिरफ्तार

     



    वाराणसी।
    साइबर अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमानत दिलाने वाले एक संगठित गिरोह का साइबर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले करीब एक वर्ष से सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से साइबर अपराध में शामिल आरोपियों की जमानत कराने का काम कर रहा था। मामले में पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

    एसीपी विदूष सक्सेना ने बताया कि गिरोह के सदस्य फर्जी पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर साइबर अपराधियों के लिए जमानतदार उपलब्ध कराते थे। इतना ही नहीं, फर्जीवाड़े को असली रूप देने के लिए थानों के नकली स्टांप भी बनवाए जाते थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अदालतों और पुलिस प्रक्रियाओं में किया जाता था, जिससे आरोपी आसानी से जमानत प्राप्त कर लेते थे।

    साइबर पुलिस को इस नेटवर्क की जानकारी एक संदिग्ध जमानत प्रक्रिया की जांच के दौरान मिली। जांच आगे बढ़ने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद गिरोह के कई अन्य सदस्यों को चिन्हित किया है। आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे रैकेट में कुछ अधिवक्ताओं की भी संलिप्तता हो सकती है। पुलिस इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है।

    उन्होंने बताया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों में पकड़े गए आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया का गलत फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। फिलहाल साइबर पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले के खुलासे के बाद न्यायिक प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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