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    'EVM फिर गरमाई यूपी की सियासत, अखिलेश यादव ने फिर छेड़ा बैलेट पेपर का मुद्दा, बोले- ब्रिटेन की तरह भारत में भी मतपत्र से हो चुनाव

     


    समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव
    ने एक बार फिर देश में मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग उठाई और ब्रिटेन में हाल में हुए चुनावों का हवाला देते हुए शनिवार को कहा कि भारत में भी मतपत्र से मतदान होना चाहिए। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने कहा, "कल एक विकसित देश में चुनाव हुए। इंग्लैंड और ब्रिटेन में गुप्त मतदान मतपत्र के जरिए हुआ। जब अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश मतपत्र से चुनाव करा सकते हैं, तो भारत में भी यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए। यह समाजवादियों की पुरानी मांग है।

    अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन में स्थानीय परिषदों तथा स्कॉटलैंड और वेल्स की संसदों के चुनावों में मतगणना जारी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने शुक्रवार को स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी को बहुस्तरीय चुनाव माफिया से लड़ना होगा। लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बचाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। आपने हमें सिर्फ ईवीएम से हराया है, लेकिन हम उन्हें ईवीएम से ही फिर हराएंगे और सत्ता से हटाएंगे।

    तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और द्रमुक नेता एम के स्टालिन के साथ अपनी तस्वीर साझा किए जाने तथा सपा-कांग्रेस गठबंधन टूटने की अटकलों पर यादव ने कहा कि यह भाजपा की फैलायी नकारात्मकता है। भाजपा केवल विभाजन और संघर्ष की राजनीति करती है। भाजपा जितना पैसा चुनाव में खर्च कर सकती है, उतना कोई दल नहीं कर सकता। लेकिन इस बार जनता बदलाव लाएगी। उत्तर प्रदेश में जो केंद्रीय बल आएंगे, वे उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत से होंगे। बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग वहां भेजे गए थे। पहली बार केंद्रीय बलों को चुनाव के बाद 15 दिन की छुट्टी दी गई है।

    भाजपा पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि पार्टी के गठन के समय उसके भीतर इस बात पर बहस थी कि वह समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष रास्ते पर चलेगी या नहीं। भाजपा के गठन के समय पारित प्रस्तावों में समाजवादी विचारधारा और धर्मनिरपेक्षता की बात कही गई थी, लेकिन वास्तव में पार्टी सांप्रदायिक और पूंजीवादी साबित हुई। खुद को समाजवादी दिखाने के लिए उन्होंने सबसे पहले मंच पर जयप्रकाश नारायण की तस्वीर लगाई। सरकारी तेल कंपनियों के घाटे का बोझ आखिरकार जनता पर डाला जाएगा। गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। सरकार नहीं, बल्कि आम लोग इसकी कीमत चुकाएंगे, क्योंकि मुनाफाखोरी कम नहीं होने दी जा रही है।

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