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    सूखे पीपल के पेड़ों की पूजा से गरमाया बीएचयू, मामले की जांच कराने की मांग


    • मोहम्मद रिजवान
    वाराणसी :- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में सूखे और क्षतिग्रस्त पीपल के पेड़ों की पूजा-अर्चना को लेकर नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग उठने लगी है।

    जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में एक कर्मचारी द्वारा सूखे पीपल के पेड़ों पर धागा बांधकर पूजा किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। तस्वीरों में पेड़ों के पास दीप जलाने और धार्मिक अनुष्ठान किए जाने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद परिसर में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    कुछ लोगों ने इसे अंधविश्वास से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सूखे पेड़ों के आसपास दीपक जलाने और धागा बांधने जैसी गतिविधियों से पेड़ों तथा आसपास के वातावरण को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं कुछ कर्मचारियों और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    दूसरी ओर, कुछ महिलाओं ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि शनिवार और वट सावित्री व्रत जैसे अवसरों पर पीपल और वट वृक्ष की पूजा भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है। उनका कहना है कि पूजा को विवाद का रूप देना उचित नहीं है।

    फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, घटना के बाद परिसर में आस्था, परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लेकर बहस तेज हो गई है।

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