वाराणसी में हीटवेव से बचाव के लिए प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, जाने बचाव के उपाय
वाराणसी:- मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव अलर्ट के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि लोगों को गर्म हवा और लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।
प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि लोग दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और तेज धूप के संपर्क में आने से परहेज करें। जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें और शरीर को ठंडा रखने का प्रयास करें।
गर्म हवाओं से बचाव के लिए लोगों को सलाह दी गई है कि घर की खिड़कियों को एल्युमीनियम पन्नी, गत्ते या अन्य रिफ्लेक्टर सामग्री से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्म हवा अंदर न आ सके। साथ ही स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखें और तापमान में होने वाले बदलाव के प्रति सतर्क रहें।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार की जानकारी रखें। बच्चों और पालतू जानवरों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़ें, क्योंकि इससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
एडवाइजरी में खानपान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से संतुलित, हल्का और ताजा भोजन करने को कहा गया है। बासी भोजन और मादक पदार्थों के सेवन से बचने की अपील की गई है। घर से बाहर निकलते समय सिर और शरीर को कपड़े या टोपी से ढककर रखने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए लस्सी, छाछ, मट्ठा, बेल का शरबत, नींबू पानी, नमक-चीनी का घोल और आम का पना जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह प्रशासन ने दी है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि हीटवेव को गंभीरता से लें, सावधानी बरतें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
कब लगती है लू
गर्मी में शरीर के द्रव्य बॉडी फ्ल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किंसस रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डॉययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में तेजी,व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
जनपद में हीटवेव (लू) के प्रति जोखिम (कमजोर वर्ग एवं क्षेत्र की पहचान)
- -05 वर्ष से कम आयु के बच्चे व 60 वर्ष से ज्यादा के व्यक्ति।
- गर्भवती महिलायें।
- ऐसे व्यक्ति जो कि सैन्य, कृषि, निर्माण और औद्योगिक व्यवसाय में श्रमिक, मजदूर, खलाड़ी आदि हों।
- शारीरिक तौर पर कमजोर व्यक्ति एवं मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति।
- त्वचा संबन्धित रोग जैसेः-सोरायसिस, पायोडर्मा आदि से प्रभावित व्यक्ति।
- पर्यावरण बदलने के कारण गर्मी के अनुकूलनता का आभाव।
गर्म हवाएं/लू की स्थिति में क्या करें, क्या न करें
सभी के लिए
- -रेडियो सुनिए, टीवी देखिए, स्थानीय मौसम समाचार के लिए समाचार पत्र पढ़ें।
- पर्याप्त पानी पियें-भले ही प्यास न लगे।
- खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू का पानी, छाछ आदि जैसे घरेलू पेय का इस्तेमाल करें।
- हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले, सूती कपड़े पहनें।
- अपना सिर ढंकेंः कपड़े, टोपी या छतरी का उपयोग करें।
- हांथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं।
- अनावश्यक घर से बाहर प्रातः 11ः00 से सायंकाल 3ः00 बजे तक न निकले बहुत ही आवश्यक होने पर चेहरे व सिर को ढककर ही निकले।
नियोक्ता और श्रमिक
- -कार्य स्थल के पास ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं।
- कार्यकर्ताओं को सीधे धूप से बचने को कहे।
- अति पारिश्रमिक वाले कार्यों को दिन के ठन्डे समय मे निर्धारित करें।
- बाहरी गतिविधियों के लिए ब्रेक की आवृत्ति में वृद्धि करें।
- गर्भवती श्रमिकों और श्रमिकों जिन्हें चिकित्सा देख-भाल की अचानक जरुरत हो सकते हो उनका अतिरिक्त ध्यान दिया जाना चाहिए।
वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिये
- -तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें।
- ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो।
- यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें।
- उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें।
- उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
शिशुओं के लिये
- -उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
- शिशुओं में गर्मी की वजह से होने वाली बीमारियों का पता लगाना सीखें।
- यदि बच्चों के पेशाब का रंग गहरा है तो इसका मतलब है कि वह डिहाईड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हैं।
- बच्चों को बिना देखरेख खड़ी गाड़ी में छोड़ कर न जाएं, वाहन जल्दी गर्म होकर खतरनाक तापमान पैदा कर सकते हैं।
पशुओं के लिए
- -जहां तक संभव हो, तेज गर्मी के दौरान उन्हें घर के भीतर रखें।
- यदि उन्हें घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छायादार स्थान में रखें, जहां वे आराम कर सकें।
- ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा गया हो वहां दिनभर छाया रहें।
- जानवरों को किसी बंद में न रखें, क्योंकि गर्म मौसम में इन्हें जल्दी गर्मी लगने लगती है।
- ध्यान रखें कि आपके जानवर पूरी तरह साफ हों, उन्हें ताजा पीने का पानी दें, पानी को धूप में न रखें। दिन के समय उनके पानी में बर्फ के टुकड़े डालें।
- पीने के पानी के दो बाउल रखें ताकि एक में पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सकें।
- अपने पालतू जानवर का खाना धूप में न रखें।
- किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोडे़।
अन्य सावधानियाँ
- -जितना हो सके घर के अंदर रहें.
- अपने घर को ठंडा रखें. पर्दे, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खुली रखें.
- निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें.
- पंखे का प्रयोग करें, कपड़ों को नम करें और ठंडे पानी में स्नान करें.
- यदि आप बेहोश या कमजोरी महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
- जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें.
- अधिक गर्मी एवं लू के कारण होने वाली बीमारियां मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, हीट इग्जॉॅस्चन एवं हीट स्ट्रोक
हीट इग्जॉस्चन के लक्षण
- -अत्यधिक प्यास
- शरीर का तापमान बढ़ा हुआ (100.4℉ जव to 104℉)
- मांसपेशियों में ऐंठन
- जी मिचलाना/उल्टी होना
- सिर का भारीपर/सिरदर्द
- रक्तचाप का कम होना
- चक्कर आना
- भ्रांति/उल्झन में होना
- अल्पमूत्रता/पेशाब का कम आना
- अधिक पसीना एवं चिपचिपी त्वचा
हीट स्ट्रोक के लक्षण
- -शरीर का तापमान बढा हुआ (>104℉)
- पसीना आना बंद होना/पसीने की ग्रंथि का निष्क्रिय होना
- मांसपेशियों में ऐंठन, चिपचिपी त्वचा
- त्वचा एवं शरीर का लाल होना
- जी मचलाना/उल्टी होना, चक्कर आना
- सिर का भारीपन/सिरदर्द, चक्कर आना
- भ्रांति/उल्झन में होना
- अल्पमूत्रता/पेशाब का कम आना
- मानसिक असंतुलन
- सांस की समस्या तथा धड़कन तेज होना
प्राथमिक उपचार उपचार
- -व्यक्ति को तुरन्त पंखे के नीचे तथा छायादार ठण्डे स्थान पर ले जायें
- कपड़ों को ढीला करें
- शरीर को गीले कपड़े से स्पंज करें
- ओ0आर0एस0 का धोल पिलायें
- मांसपेशियों पर दबाव डालें तथा हल्की मालिश करें
- शरीर के तापमान को बार-बार जाचें
- यदि कुछ समय में व्यक्ति सामान्य हो तो तुरंत चिकित्सा केंद्र ले जाये

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