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    ज्ञानवापी बवाल केस में 21 साल बाद बड़ा फैसला, BJP नेता समेत 14 आरोपी बरी

    वाराणसी :-
    वर्ष 2005 के बहुचर्चित ज्ञानवापी उपद्रव मामले में करीब 21 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम की अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए 14 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने यह निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद सुनाया।

    आरोपमुक्त किए गए लोगों में राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू, शंकर गिरी, भानू मिश्रा उर्फ संजीव रतन मिश्रा, अजय चौबे, गुलशन कपूर, जुगनू, मोहम्मद एजाज, सलीम, इरफान, शेर अली, गुरशेर अली, शमशेर अली, बच्चा मुसलमान उर्फ बच्चा और जब्बार मियां मंसूरी शामिल हैं। मामले में शुरुआत में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जबकि विवेचना के दौरान 16 लोगों को पाबंद किया गया था। इनमें जहांगीर कादरी और शिव सेठ का निधन हो चुका है। विभिन्न अदालतों में स्थानांतरण के बाद यह मामला 9 अगस्त 2023 को विचारण के लिए संबंधित न्यायालय में पहुंचा था।

    जानिए क्या था पूरा मामला

    यह मामला 2 सितंबर 2005 का है, जब जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग ज्ञानवापी क्षेत्र की ओर जा रहे थे। उसी दौरान मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी उसी रास्ते से गुजर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मी छत्ताद्वार पर लोगों की जांच के बाद उन्हें प्रवेश दे रहे थे।

    इसी दौरान मौलाना बातिन वहां पहुंचे। पुलिसकर्मियों द्वारा उनकी तलाशी लिए जाने पर उनके साथ मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों से बहस की और विरोध जताना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कुछ लोग वापस ज्ञानवापी चौराहे की ओर लौट गए, जहां प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।

    स्थिति तनावपूर्ण होने पर तत्कालीन चौक प्रभारी प्रदीप कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारियों ने मौलाना बातिन और अन्य लोगों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया।

    इसी बीच राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू तिवारी का नाम भी सामने आया। आरोप था कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अलावा किसी अन्य अधिकारी से वार्ता नहीं की जाएगी और मौलाना बातिन को बातचीत से रोकने का प्रयास किया। इससे मौके पर मौजूद लोगों में और तनाव बढ़ गया।

    हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई और प्रशासन द्वारा संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद मौलाना बातिन नमाज के लिए तैयार हो गए। दोपहर करीब तीन बजे नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार नमाज समाप्त होने के बाद स्थिति फिर बिगड़ गई। आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में लोग ज्ञानवापी चौराहे पर एकत्र हो गए और नारेबाजी करते हुए पुलिस चौकी व अन्य सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने लगे। पुलिस ने भीड़ को हटने की चेतावनी दी, लेकिन आरोप है कि इसके बाद पथराव शुरू हो गया।

    पुलिस का दावा था कि घटना के दौरान सरकारी वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि मंदिर और मस्जिद दोनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। अब लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 14 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है।

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