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    हाईकोर्ट में लंबित मामले के बीच अजगैब शहीद मस्जिद पर कार्रवाई से विवाद, अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल


    • मोहम्मद इरफान/अनिल सिंह

    वाराणसी :- आदमपुर थाना क्षेत्र के राजघाट स्थित कथित करीब 200 वर्ष पुरानी अजगैब शहीद मस्जिद पर प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कार्रवाई के विरोध में अधिवक्ताओं और स्थानीय पक्षकारों ने गंभीर आपत्ति जताते हुए दावा किया है कि संबंधित भूमि एवं निर्माण का मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में कार्रवाई की वैधता और समय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।



    मंगलवार देर रात प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद परिसर के कथित अवैध निर्माण वाले हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई की। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस, पीएसी और केंद्रीय बलों समेत लगभग 1000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। क्षेत्र के प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।

    बताया जा रहा है कि ध्वस्तीकरण के लिए एक साथ पांच बुलडोजर लगाए गए। आधी रात से शुरू हुई कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे तथा पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे।

    कार्रवाई से पहले जेसीपी शिवहरी मीणा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वहीं डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, एडीसीपी वैभव बांगर और एसीपी विजय प्रताप समेत कई अधिकारी मौके पर तैनात रहे।

    वकीलों का दावा- हाईकोर्ट में लंबित है मामला


    अधिवक्ता मोहम्मद मोइद्दीन खान उर्फ रॉकी ने बताया कि यह संपत्ति अजगैब शहीद से जुड़ी हुई है, जो वक्फ बोर्ड में वक्फ संख्या-381 के तहत दर्ज है। उनके अनुसार, लगभग 19 बिस्वा भूमि में फैले इस परिसर में सात मजारें स्थित थीं।

    उन्होंने दावा किया कि परिसर में एक भूमिगत हिस्सा (अंडरग्राउंड हाता) भी मौजूद था, जहां एक प्राचीन कुआं स्थित था। साथ ही परिसर में लगभग 100 वर्ष पुराना गुलर का पेड़ भी था। अधिवक्ता का कहना है कि संबंधित मामले को लेकर पहले से न्यायालय में याचिका लंबित है, ऐसे में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं प्रतीत होती।

    अधिवक्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और कार्रवाई की वैधता की समीक्षा की मांग की है।

    मॉडल स्टेशन परियोजना से जुड़ा बताया जा रहा मामला

    जानकारी के अनुसार, भदऊ चुंगी स्थित किला कोहना क्षेत्र में मौजूद मस्जिद और कब्रिस्तान परिसर को काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया था। मस्जिद के मुतवल्ली शमीम उस्ताद का लगभग दो महीने पूर्व निधन हो गया था। परिसर में दनियाल शाह बाबा की मजार भी स्थित बताई जाती है।

    बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में रेलवे द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मस्जिद और कब्रिस्तान पक्ष की ओर से इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। दावा किया जा रहा है कि मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।

    प्रशासन का पक्ष

    वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संबंधित कार्रवाई नियमानुसार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण से संबंधित आवश्यक नोटिस पहले ही जारी किए गए थे तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई अमल में लाई गई।

    हालांकि मामले को लेकर अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है और स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है।

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