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    मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा बाजारों के प्रस्तावित स्थानांतरण पर जमीयतुल कुरैश ने किया गुस्से का इजहार

    • मोहम्मद रिजवान
    वाराणसी में मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा बाजारों के प्रस्तावित स्थानांतरण पर ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश ने गुस्से का इजहार किया है। (यूथ विंग) के प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद तौफीक कुरैशी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि वाराणसी नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा व्यापार से जुड़ी दुकानों और बाजारों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव अफसोसजनक है। किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले उससे प्रभावित व्यापारियों, कर्मचारियों, श्रमिकों और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

    उन्होंने कहा कि नगर निगम की कार्यकारिणी द्वारा मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा बाजारों को रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर जैसे बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। यदि यह निर्णय बिना व्यापक विचार-विमर्श, पर्याप्त तैयारी और व्यापारियों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था के लागू किया जाता है तो इससे हजारों लोगों के रोजगार और आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

    हाजी तौफीक कुरैशी ने कहा कि नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में लगभग 350 से 400 मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा विक्रेताओं की दुकानें संचालित हैं। इन दुकानों से केवल दुकानदार ही नहीं बल्कि कसाई, सफाई कर्मचारी, परिवहन कर्मी, लोडिंग-अनलोडिंग श्रमिक, फ्रीजर एवं कोल्ड स्टोरेज से जुड़े कर्मचारी, थोक व्यापारी तथा अन्य सहायक व्यवसायों से जुड़े हजारों परिवार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। इसलिए यह विषय केवल दुकानों के स्थानांतरण का नहीं बल्कि हजारों परिवारों के आर्थिक भविष्य का प्रश्न है।

    उन्होंने कहा कि मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा व्यापार वर्षों से शहर की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इस व्यापार से जुड़े लोगों ने नियमों का पालन करते हुए अपने व्यवसाय को स्थापित किया है और नगर निगम को नियमित शुल्क एवं करों का भुगतान भी किया है। ऐसे में व्यापारियों को बिना विश्वास में लिए और उनकी सहमति के बिना किसी भी प्रकार का एकतरफा निर्णय न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

    हाजी तौफीक कुरैशी ने मांग की कि यदि नगर निगम बाजारों को स्थानांतरित करना चाहती है तो सबसे पहले प्रस्तावित स्थलों पर आधुनिक और पूर्ण विकसित बाजार तैयार किए जाएं। वहां पक्की दुकानें, स्वच्छ पेयजल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था, सीवर एवं जल निकासी, कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था, शौचालय, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन सुविधाएं, पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जांच केंद्र तथा ग्राहकों के लिए सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाए। केवल भूमि चिन्हित कर देना या अस्थायी व्यवस्था कर देना व्यापारियों के साथ अन्याय होगा।

    उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नई मंडियों का निर्माण कब तक पूरा होगा, दुकानों का आवंटन किन मानकों के आधार पर किया जाएगा, वर्तमान दुकानदारों को क्या प्राथमिकता दी जाएगी और स्थानांतरण की अवधि में व्यापारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी। जब तक इन सभी प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू नहीं की जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि बाजारों को शहर से बहुत दूर स्थापित किया जाता है तो आम नागरिकों के लिए वहां पहुंचना कठिन होगा। इससे ग्राहकों की संख्या में कमी आएगी और व्यापारियों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसी स्थिति में अनेक छोटे दुकानदार आर्थिक रूप से टूट सकते हैं और उनके सामने बेरोजगारी का संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए स्थानांतरण से पहले व्यापारिक व्यवहार्यता, ग्राहक पहुंच और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता का विस्तृत अध्ययन कराया जाना चाहिए।

    हाजी तौफीक कुरैशी ने नगर निगम की बैठक में पार्षद गुलशन अली द्वारा उठाए गए उस महत्वपूर्ण मुद्दे का भी समर्थन किया जिसमें श्रावण मास सहित विभिन्न अवसरों पर व्यापारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान की चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि पहले से ही व्यापारिक चुनौतियों, बढ़ती महंगाई, लाइसेंस संबंधी जटिलताओं और घटती क्रय शक्ति के कारण व्यापारी वर्ग दबाव में है। ऐसे समय में बिना उचित पुनर्वास योजना के स्थानांतरण का निर्णय उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा सकता है।

    उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को वैध व्यवसाय करने तथा सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने का अधिकार प्रदान करता है। इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि स्वच्छता, नगर विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं के साथ-साथ नागरिकों के रोजगार और आजीविका के अधिकार का भी सम्मान करे। विकास का अर्थ किसी वर्ग के रोजगार को संकट में डालना नहीं बल्कि सभी हितधारकों को साथ लेकर आगे बढ़ना है।

    ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश मांग करती है कि प्रस्ताव को लागू करने से पूर्व मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा व्यापारियों, कुरैशी समाज के प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापार मंडलों तथा संबंधित अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए। सभी पक्षों के सुझावों और सहमति के आधार पर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।

    संगठन यह भी मांग करता है कि जब तक नई जगहों पर सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित होकर बाजार पूरी तरह संचालित करने योग्य न हो जाएं, तब तक किसी भी दुकानदार को हटाने, दुकान सील करने या व्यापार बंद कराने जैसी कोई कार्रवाई न की जाए। व्यापारियों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए बिना किसी प्रकार का दबाव बनाना न केवल अनुचित होगा बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा आघात होगा।

    अंत में हाजी मोहम्मद तौफीक कुरैशी ने कहा कि कुरैशी समाज कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास रखता है। समाज स्वच्छता, विकास और बेहतर नगर व्यवस्था का समर्थन करता है, लेकिन विकास के नाम पर मीट, मांस, मछली एवं मुर्गा व्यापार से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रशासन को ऐसा संतुलित और न्यायपूर्ण समाधान निकालना चाहिए जिससे शहर का विकास भी हो और व्यापारियों तथा श्रमिकों के अधिकार एवं रोजगार भी सुरक्षित रहें।

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