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    पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की आग! ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, बढ़ा तनाव

    पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। क्षेत्र में युद्ध की आग शांत होने की बजाय और भड़कती दिखाई दे रही है। ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बताया जा रहा है कि बीते एक सप्ताह में कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर यह ईरान का तीसरा बड़ा हमला है।

    मंगलवार रात हालात तब और गंभीर हो गए, जब ईरान ने कुवैत के अल सलेम एयर बेस और बहरीन के ईसा एयर बेस को निशाना बनाया। तेहरान ने इन हमलों को अमेरिकी "शत्रुतापूर्ण कार्रवाई" का जवाब बताया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय और एयरबेस को टारगेट किया गया।

    आसमान में दागी गई इंटरसेप्टर मिसाइलें

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रात के अंधेरे में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय दिखाई दिए। ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी गईं। हालांकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि एक इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को रोकने में नाकाम रही और गैर-सैन्य क्षेत्र में जा गिरी। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कुवैत और बहरीन में अलर्ट

    मिसाइल हमलों के बाद बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए, जबकि इराक के एरबिल क्षेत्र में भी लोगों को सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकी गई मिसाइलों के मलबे या संदिग्ध वस्तुओं से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध सामग्री की सूचना तुरंत आपातकालीन सेवाओं को दें।

    अमेरिका का जवाब

    ईरानी हमले पर अमेरिकी सेना का कहना है कि अधिकांश मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहीं। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने कई ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।

    CENTCOM ने दावा किया कि कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें रास्ते में ही गिर गईं, जबकि बहरीन की ओर दागी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया।

    एक सप्ताह में तीसरी बड़ी कार्रवाई

    29 मई को ईरान ने फतेह-110 बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया था। इसके बाद 1 जून को भी बैलिस्टिक मिसाइलों और कामिकाज़े ड्रोन से बड़ा हमला किया गया। अब ताजा हमले ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

    क्या बढ़ेगा टकराव?

    ईरान और अमेरिका के बीच बदले की कार्रवाई लगातार तेज होती दिख रही है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, ताजा हमले उन प्रयासों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र अब दोनों देशों के बीच टकराव का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।


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