मानसून की चाल धीमी, लेकिन पूर्वांचल में सप्ताहभर के भीतर बदल सकता है मौसम
वाराणसी :- सावन आने को माह भर बाकी है लेकिन मानसून फुहार बन कर भी बरसने से मानो इन्कार किए बैठा है। पूर्वांचल के काफी करीब आने के बाद भी ठिठका मानसून पूर्वांचल में चुनौतियां दिए पड़ा हुआ है। मानसून के आगमन के इंतजार में सप्ताह भर का विलंब हो चुका है और 20 जून को यूपी में पूर्वांचल के रास्ते प्रवेश करने वाला मानसून पूर्वांचल की दहलीज पर ठिठका हुआ है।
मानसूनी बारिश की आस पूरी नहीं होने की वजह से समूचा पूर्वांचल पर्याप्त रूप से तप रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मानसून भले ही आ जाए लेकिन एक एक बीतता हुआ दिन खेती किसानी पर भारी पड़ रहा है। किसानों के सामने तपता सूरज और मानसून की आस सबसे बड़ी चुनौती है। खुद की सिंचाई के आस पर भी किसान मानसून के दगा देने की भविष्यवाणी से अगेती खेती न कर पाने का सुकून मना रहे हैं तो पिछेती के पिछड़ने की टीस भी है।मौसम विभाग की ओर से जारी चार्ट के अनुसार मानसून पूर्वांचल के पूर्व में बिहार के सासाराम के करीब और सोनभद्र के दक्षिण में सिंगरौली के करीब ठिठका हुआ है। जबकि मानसून के आने में करीब सप्ताह भर का पूर्वांचल में विलंब हो चुका है। मानसून के आगमन की आस में लोग अब दिन गिन रहे हैं लेकिन मानसून उस रेखा को रोज ही पार कर पाने में विफल हो जा रहा है। माना जा रहा है कि अब आगे और विलंब होने पर चुनौतियां सिर उठाने लगेंगी।
हालांकि पूर्वांचल में लोकल हीटिंंग है, रातें गर्म हैं और मानसून के आगमन के हालात पूरी तरह से अनुकूल बने हुए हैं। इसके साथ ही वातावरण में लोकल हीटिंंग का असर भी बना हुआ है और नमी का असर भी हो रहा है। इसकी वजह से आने वाले दिनों में मौसम का रुख बदल भी सकता है। हालांकि मौसम विभाग ने अब बादलों की आवाजाही के संकेत देते हुए मानसूनी सक्रियता का अनुमान जारी किया है। माना जा रहा है कि अब मानसूनी सक्रियता का रुख जुलाई के पहले सप्ताह तक पूर्वांचल में शुरू होने से राहत का अनुमान है।


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