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    वाराणसी में मीट, मछली और मुर्गा दुकानों को शहर से बाहर करने के फैसले का विरोध, नगर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

    वाराणसी :-
    नगर निगम द्वारा शहर की मीट, मछली एवं मुर्गा दुकानों को नगर सीमा से 10–15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में मांस-मछली व्यवसायियों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। सिगरा क्षेत्र से निकाले गए पैदल मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर निर्णय वापस लेने की मांग की।
    प्रदर्शन में मीट-मछली व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों महिला-पुरुषों के साथ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, भाकपा (माले), अपना दल (कमेरावादी), विभिन्न छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
    चौकाघाट मछली मंडी के दिनेश चौहान ने कहा कि नगर निगम का फैसला केवल व्यापारिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि हजारों छोटे दुकानदारों, कामगारों और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है।
    वहीं, बंगाली समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि मछली की दुकानें शहर से बाहर भेजी गईं तो लाखों उपभोक्ताओं को आवश्यक खाद्य सामग्री खरीदने के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
    शिवपुर मंडी के अवधेश पटेल ने आरोप लगाया कि स्वच्छता के नाम पर छोटे कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन कंपनियों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
    लहरतारा मीट मंडी के सुमित सोनकर ने कहा कि यह नीति छोटे व्यापारियों को कमजोर कर बड़े कॉरपोरेट कारोबार को बढ़ावा देने वाली है।

    कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी सदियों से विविध संस्कृति और खान-पान की परंपराओं वाला शहर रहा है। किसी एक विचारधारा के आधार पर लोगों की भोजन संबंधी पसंद और रोजगार के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना संविधान की भावना के विपरीत है।

    समाजवादी पार्टी के पार्षद हारून ने मांग की कि नगर निगम अपना निर्णय तत्काल वापस ले और मीट-मछली विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें लाइसेंस, पक्की दुकानें, स्वच्छ पेयजल, बिजली, कोल्ड स्टोरेज और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए।

    आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश पटेल ने कहा कि बड़ी संख्या में विक्रेता सड़क किनारे दुकान लगाकर आजीविका चलाते हैं। उन्हें स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम-2014 के तहत पंजीकृत कर वेंडिंग जोन में स्थान दिया जाना चाहिए।

    भाकपा के अजय मुखर्जी ने कहा कि नगर निगम का फैसला आजीविका की स्वतंत्रता के साथ-साथ लोगों की भोजन की स्वतंत्रता पर भी प्रभाव डालता है।
    ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
    • नगर निगम का मीट, मछली और मुर्गा दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए।
    • वर्तमान दुकानों का सर्वे कर उन्हें नियमित (रेगुलराइज) किया जाए।
    • सभी विक्रेताओं को आवश्यक लाइसेंस और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएं।
    • नियोजित स्थानों पर पक्की दुकानें, स्वच्छ पानी, बिजली, कोल्ड स्टोरेज और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की सुविधा दी जाए।
    • सभी दुकानों में ग्रीन नेट/ब्लैक ग्लास, फ्लाई कैचर, रेफ्रिजरेशन और स्वच्छ पैकिंग जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की जाएं।
    • स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम-2014 के तहत पात्र दुकानदारों को कानूनी संरक्षण दिया जाए।
    • शहर के भीतर संचालित मीट और मछली मंडियों का विकास कर व्यवस्थित बाजार तैयार किए जाएं।
    • नागरिकों के भोजन, व्यापार और आजीविका से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
    कार्यक्रम का संचालन नंदलाल मास्टर और संजीव सिंह ने किया

    प्रदर्शन के दौरान "मीट-मछली पर प्रतिबंध का फैसला वापस लो", "व्यवसाय पर रोक नहीं सहेंगे, आजीविका पर चोट नहीं सहेंगे", "मीट खाने से परहेज नहीं, तो मीट बेचने पर रोक क्यों" और "नगर निगम की मनमानी नहीं चलेगी" जैसे नारों वाली तख्तियां लोगों का ध्यान आकर्षित करती रहीं।

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