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    अमेरिकी हमले की चपेट में आए भारतीय, देवरिया और हमीरपुर के युवकों की मौत से दहला देश

    हमीरपुर के आदित्य और देवरिया के शिवानंद की मौत से दो राज्यों में शोक

    ओमान के निकट हार्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मृतकों में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के 23 वर्षीय आदित्य शर्मा और उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के 36 वर्षीय शिवानंद चौरसिया शामिल हैं। तीसरे भारतीय की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। घटना की सूचना मिलते ही दोनों राज्यों में शोक की लहर दौड़ गई और परिवारों में कोहराम मच गया।

    इकलौते बेटे की मौत से टूट गया परिवार

    हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र स्थित हरेटा गांव निवासी आदित्य शर्मा अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। परिवार के अनुसार वह जल्द ही घर लौटने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत की दुखद खबर पहुंच गई।

    आदित्य शर्मा
    आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने केंद्र सरकार से बेटे का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की मांग की है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराए जाने और हमले के समय की परिस्थितियों की जानकारी परिवार को उपलब्ध कराने की भी अपील की है।

    आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल ने कहा कि परिवार यह जानना चाहता है कि हमले के समय आदित्य जहाज पर किस स्थिति में था और आखिर ऐसी घटना कैसे हुई। वहीं दादा अशोक कुमार ने जहाज को संवेदनशील क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनुमति देने वालों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    गांव में जैसे ही घटना की जानकारी पहुंची, बड़ी संख्या में लोग आदित्य के घर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।

    देवरिया के शिवानंद चौरसिया की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    शिवानंद चौरसिया
    उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया परिवार के बड़े बेटे थे। उनके पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। परिवार के भरण-पोषण के लिए वे समुद्री जहाज पर फीटर के रूप में कार्यरत थे।

    परिजनों के अनुसार शिवानंद लगभग छह महीने पहले नौकरी के सिलसिले में मुंबई गए थे। वहां से वे सिंगापुर पहुंचे और वापस लौटने के दौरान यह हादसा हुआ। उनके पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि 9 जून को उनकी अंतिम बार बेटे से बातचीत हुई थी। उस दौरान शिवानंद ने बताया था कि वह ओमान के पास समुद्री क्षेत्र में हैं और सब कुछ सामान्य है। इसके बाद उन्हें बेटे की मौत की सूचना मिली।

    घटना की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। शिवानंद की पत्नी सुशीला, जो उस समय अपने मायके में थीं, सूचना मिलते ही ससुराल पहुंचीं। पूरे गांव में शोक का माहौल है और लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।

    परिवारों ने उठाईं कई मांगें

    दोनों मृतकों के परिजनों ने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने और यह पता लगाने की मांग की है कि जहाज को जोखिम वाले क्षेत्र में जाने की अनुमति कैसे मिली।

    शिवानंद चौरसिया के परिवार ने आर्थिक सहायता के रूप में एक करोड़ रुपये के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।

    इस दर्दनाक घटना ने न केवल दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि उनके गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भी शोक की लहर दौड़ा दी है। अब सभी की निगाहें सरकार और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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