राजनीति में फिर गरमाया पुराना मामला, ओपी राजभर ने अखिलेश को दिलाई हाईकोर्ट वाली बात
व्यंग्य से की पोस्ट की शुरुआत
ओपी राजभरने अपनी पोस्ट की शुरुआत व्यंग्यात्मक अंदाज में की। उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास है कि अखिलेश यादव हमेशा की तरह "बेखबर, मस्त और बिना काम के व्यस्त" होंगे। इसके बाद उन्होंने 6 जून 2013 का जिक्र करते हुए कहा कि इसी दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, ''आज 6 जून है, सोचा आपको याद दिला दूं। आज ही के दिन 2013 में आपकी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक प्रश्न पूछकर कसके रगड़ा था। याद आया… ?''
पुराने फैसले का दिलाया हवाला
राजभर ने दावा किया कि अदालत ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के फैसले पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में एक पुरानी खबर का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उल्लेख था कि 2007 के लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद बम धमाकों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था और सरकार से आरोपियों की सूची मांगी थी।
2027 चुनाव से जोड़ा मुद्दा
इसी संदर्भ को आधार बनाते हुए राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला किया और कहा कि उन्हें अपने पुराने फैसलों को याद करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि इससे उन्हें "अपने पाप याद आ जाएंगे" और 2027 के चुनाव में हार होने पर ईवीएम या अन्य कारणों को दोष देने का अवसर नहीं मिलेगा।
सपा कार्यकर्ताओं पर भी टिप्पणी
राजभर ने अपनी पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सपा समर्थकों को यह जानना चाहिए कि अतीत में उनकी सरकार ने कौन-कौन से फैसले लिए थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी बात हिंदी में भी लिखने की बात कही। पोस्ट के अंत में उन्होंने वह राजनीतिक नारा भी दोहराया जिसे भाजपा और उसके सहयोगी दल लंबे समय से समाजवादी पार्टी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
तेज होती चुनावी बयानबाजी
हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। NDA के सहयोगी दलों के नेता लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं, जबकि विपक्ष भी सरकार के खिलाफ मुखर है। ऐसे में आने वाले महीनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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