यूपी में मानसून की दस्तक अब बेहद करीब, पूर्वांचल में जल्द मिल सकती है गर्मी से राहत
वाराणसी :- उत्तर प्रदेश में मानसून के इंतजार की घड़ियां अब खत्म होने वाली हैं। मौसम की ताजा गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही पूर्वांचल के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। इसके साथ ही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
सोमवार को सुबह वाराणसी और आसपास के इलाकों में बादलों की आवाजाही देखने को मिली। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बादल छंट गए, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी प्रणाली बिहार में तेजी से सक्रिय हुई है और अब सासाराम के आसपास तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो अगले दो से तीन दिनों में पूर्वांचल में मानसून का असर दिखाई देने लगेगा।मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसून की अग्रिम रेखा अब सोनभद्र से ज्यादा दूर नहीं रह गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश में इसकी औपचारिक एंट्री किसी भी समय हो सकती है। मानसून के आगमन के साथ बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और खरीफ फसलों की बुवाई के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी।
आमतौर पर मानसून 20 जून के आसपास सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार कुछ दिनों तक धीमी रही। पिछले सप्ताह तक मानसूनी प्रणाली बिहार और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लगभग स्थिर बनी हुई थी। हालांकि हाल के दिनों में वातावरण में बढ़ी नमी और प्री-मानसूनी गतिविधियों के कारण इसकी गति में फिर तेजी आई है।पूर्वांचल में सुबह और शाम के समय बादलों की बढ़ती मौजूदगी भी मानसून के करीब आने का संकेत मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार की ओर से बढ़ रही मानसूनी गतिविधियां जल्द ही सोनभद्र पहुंच सकती हैं और वहीं से उत्तर प्रदेश में प्रवेश का रास्ता बनाएंगी।
सोनभद्र को लंबे समय से प्रदेश में मानसून के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े इस जिले में सबसे पहले मानसूनी बादलों का जमावड़ा होता है। इसके बाद बारिश का सिलसिला वाराणसी, जौनपुर, अयोध्या और फिर राजधानी लखनऊ तक पहुंचता है।
हालांकि इस वर्ष मानसून की एंट्री सामान्य तिथि की तुलना में कुछ दिन देरी से होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक जलवायु कारकों के चलते बारिश के वितरण में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद पूर्वांचल में जल्द मानसूनी बारिश शुरू होने के संकेत लगातार मजबूत हो रहे हैं।



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