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    देश के महान निशानेबाज को काशी का सलाम, मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

    वाराणसी :-
    भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्याय लिखने वाले अंतरराष्ट्रीय शूटर और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा को शनिवार शाम काशी ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान खेल जगत, राजनीतिक क्षेत्र, प्रशासनिक अधिकारियों और उनके हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी ने इस क्षण को भावुक बना दिया।
    जसपाल राणा का पार्थिव शरीर शिवपुर स्थित चांदमारी रिंग रोड के एक निजी परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इसके बाद पार्थिव शरीर को सुसज्जित अर्थी पर रखा गया और अंतिम यात्रा निकाली गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र एवं विधायक पंकज सिंह सहित परिजनों और करीबी सहयोगियों ने अर्थी को कंधा देकर अंतिम यात्रा में सहभागिता निभाई।
    शाम होते-होते अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची, जहां पहले से ही अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। घाट पर मौजूद लोगों ने "जसपाल राणा अमर रहें" के नारों के बीच अपने प्रिय खिलाड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राजकीय सम्मान के तहत पुलिस बल ने उन्हें अंतिम सलामी दी, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न हुई।
    इस अवसर पर परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं। खेल जगत से जुड़े कई खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। निशानेबाज संदीप कुमार ने कहा कि जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राणा ने न केवल अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी दिशा देने का कार्य किया।
    जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का परचम लहराया। एशियाई खेलों समेत अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। खिलाड़ी, कोच और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
    उनके निधन की खबर से देशभर के खेल प्रेमियों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों, खेल संगठनों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। काशी के मणिकर्णिका घाट पर हुआ उनका अंतिम संस्कार केवल एक खिलाड़ी की विदाई नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय को अंतिम प्रणाम था।यह संस्करण समाचार पत्र और वेब पोर्टल प्रकाशन शैली में पूरी तरह नया और अधिक भावनात्मक तथा पेशेवर ढंग से तैयार किया गया है।

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