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    परमा एकादशी पर आस्था का सैलाब: काशी के घाटों पर उमड़े हजारों श्रद्धालु, गंगा स्नान कर किया दान-पुण्य

    • मोहम्मद रिजवान
    वाराणसी :- धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में पुरुषोत्तम मास की पावन परमा एकादशी के अवसर पर गुरुवार को श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भोर की पहली किरण के साथ ही हजारों श्रद्धालु गंगा तटों पर पहुंच गए और मां गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।

    दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, केदार घाट, पंचगंगा घाट, राजघाट, गाय घाट, शीतला घाट, मीर घाट, अहिल्याबाई घाट तथा सामने घाट समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। गंगा तट "हर-हर महादेव" और "हर-हर गंगे" के जयघोष से गुंजायमान रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

    गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और जप-तप किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दशाश्वमेध क्षेत्र स्थित देवगुरु बृहस्पति मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। इसके बाद काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेककर सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

    परमा एकादशी के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही, जिससे पूरे शहर में धार्मिक उल्लास का माहौल रहा।

    नक्खीघाट तपोवन निवासी वैदिक विद्वान पंडित रविन्द्र तिवारी ने बताया कि पुरुषोत्तम (अधिक) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा, पुरुषोत्तमी अथवा कमला एकादशी कहा जाता है। सामान्य वर्षों में 24 एकादशियां होती हैं, जबकि अधिक मास आने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। अधिक मास की दो प्रमुख एकादशियों में पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है।

    उन्होंने बताया कि परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव तथा भगवान शिव की कृपा से धन के देवता कुबेर को देवताओं के कोषाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ था। शास्त्रों में इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली तथा मोक्षदायिनी एकादशी बताया गया है।

    सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, जप, दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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