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    2027 चुनाव से पहले सियासत तेज: अखिलेश की प्रस्तावित PDA यात्रा पर भाजपा का निशाना, सुनील भराला बोले- जनता अब बहकावे में नहीं आएगी

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सितंबर में प्रस्तावित पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रथ यात्रा को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता सुनील भराला ने सपा की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता अब भ्रम फैलाने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।

    पीडीए की अवधारणा पर उठाए सवाल

    सुनील भराला ने कहा कि पीडीए को लेकर लगातार बातें की जाती हैं, लेकिन आखिर यह है कौन और इसका उद्देश्य क्या है? उनका आरोप था कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान समाजवादी पार्टी ने इसी मुद्दे के जरिए लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन जनता ने सब समझ लिया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2027 के विधानसभा चुनाव में पहले से भी बड़ी जीत हासिल करेगी।

    सितंबर से प्रस्तावित है सपा की रथ यात्रा

    समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेशव्यापी पीडीए रथ यात्रा की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यात्रा सितंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है। इसके माध्यम से सपा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    धार्मिक नगरी से हो सकती है शुरुआत

    चर्चा है कि इस रथ यात्रा का शुभारंभ किसी प्रमुख धार्मिक नगरी से किया जा सकता है। अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे शहर संभावित विकल्पों में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि यात्रा के शुरुआती स्थल को लेकर अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    पूरे प्रदेश में पहुंचने की तैयारी

    पार्टी की योजना यात्रा को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों और 75 जिलों तक ले जाने की है। सपा का फोकस पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट और गुर्जर बहुल क्षेत्रों में भी संगठन को मजबूत करने पर रहेगा। बुलंदशहर और मुरादाबाद मंडल को भी रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश खुद करेंगे नेतृत्व

    प्रस्तावित यात्रा का नेतृत्व स्वयं अखिलेश यादव करेंगे। इसके लिए पार्टी के सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। सांसद डिंपल यादव, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

    चुनावी तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

    हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था, जबकि भाजपा अब 2027 में सत्ता बरकरार रखने के लक्ष्य के साथ अपनी चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी हुई है।


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