• Breaking News

    'कोर्ट जाएंगे या नहीं?' जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के बीच तंजीम फातिमा ने तोड़ी चुप्पी, दिया यह जवाब

    Rampur News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जेल में बंद आजम खान की ओर से स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद 40 भवनों में से 38 को कथित तौर पर अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। संस्थान को 15 दिनों के भीतर स्वयं कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा प्राधिकरण नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आजम खान की पत्नी और पूर्व सांसद तंजीम फातिमा का भी बयान सामने आया है।

    कोर्ट जाने के सवाल पर क्या बोलीं तंजीम फातिमा?

    एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में तंजीम फातिमा ने कहा कि फिलहाल इस मामले में जो भी जानकारी है, वह सार्वजनिक हो चुकी है। उन्होंने कहा, "अखबारों में सब कुछ आ चुका है, मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है। अभी 15 दिन का समय दिया गया है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।"

    15 दिन बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई

    रामपुर विकास प्राधिकरण के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर 15 दिनों की समयसीमा दी गई है। यदि इस अवधि में कथित अवैध निर्माण नहीं हटाए गए तो प्रशासन स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है।

    ड्रीम प्रोजेक्ट पर मंडरा रहा संकट

    यदि प्रशासन की ओर से बुलडोजर कार्रवाई होती है तो इसका सबसे बड़ा असर आजम खान के महत्वाकांक्षी शैक्षणिक प्रोजेक्ट पर पड़ेगा। चूंकि अधिकांश भवन कार्रवाई के दायरे में बताए जा रहे हैं, इसलिए विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित है विश्वविद्यालय

    यह विश्वविद्यालय स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और पत्रकार मौलाना मोहम्मद अली जौहर की स्मृति में स्थापित किया गया था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और वर्ष 1923 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। खिलाफत आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

    जमीन और निर्माण को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

    मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का नाम पहले भी जमीन संबंधी विवादों में सामने आ चुका है। विभिन्न मामलों में किसानों की जमीन और सरकारी भूमि के कथित अधिग्रहण के आरोप लगाए गए थे। इन्हीं मामलों से जुड़े आरोपों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच की थी और प्रशासन से कई दस्तावेज मांगे थे।

    प्राधिकरण का दावा- स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हुआ निर्माण

    रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि परिसर में बने 38 भवन स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी आधार पर इन्हें अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया है। हालांकि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

    अगले कदम पर टिकी सबकी नजर

    अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 15 दिनों की समयसीमा समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन क्या निर्णय लेता है और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है। यदि मामला अदालत पहुंचता है तो कानूनी प्रक्रिया भी इस पूरे विवाद में अहम भूमिका निभा सकती है।


    No comments

    Post Top Ad

    Post Bottom Ad