काशी में गुरु पूर्णिमा का भव्य आयोजन, शिष्यों ने किया चरण पादुका पूजन; अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया गौरक्षा का संदेश
वाराणसी :- ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर के सनातन धर्मावलंबियों से गौसंरक्षण और गौरक्षा का संकल्प लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं, इसलिए उनका संरक्षण प्रत्येक श्रद्धालु का नैतिक और धार्मिक कर्तव्य है।इस वर्ष जगद्गुरु शंकराचार्य चातुर्मास्य व्रत के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहेंगे, जिसके चलते गुरु पूर्णिमा पर उनका काशी आगमन नहीं होगा। उनकी अनुपस्थिति में वाराणसी स्थित शिष्यों और भक्तों ने सोमवार शाम श्रद्धापूर्वक चरण पादुका पूजन कर गुरु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।गौसेवा को बताया सनातन संस्कृति का आधार
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शास्त्रों में गौमाता को समस्त देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। गौपूजन से सभी देवताओं की आराधना का पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों में पहली रोटी गौमाता को अर्पित करने की परंपरा हमारी संस्कृति में गौ के सर्वोच्च स्थान को दर्शाती है। समाज को इस परंपरा को जीवित रखते हुए गौसंरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में होगा चातुर्मास्य व्रत
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष चातुर्मास्य व्रत छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में संपन्न होगा। यहां विश्व के सबसे बड़े सवा लाख शिवलिंगों वाले भव्य शिव मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। चातुर्मास के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, आध्यात्मिक प्रवचनों और विभिन्न आयोजनों के साथ उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।



No comments