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    "शिक्षा व्यवस्था पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की दोटूक— इस्तीफा जवाबदेही तय करता है, सिस्टम बदलने की गारंटी नहीं"

    वाराणसी स्थित विद्या मठ लौटने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 81 दिनों की गौरक्षा यात्रा पूरी करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक विवाद, छात्र आंदोलन, गौरक्षा और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।
    उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन को लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण मिसाल बताया। उनका कहना था कि छात्रों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखी, जिसके बाद सरकार को जवाब देना पड़ा। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा अपने आप में पूरे सिस्टम में बदलाव की गारंटी नहीं होता, लेकिन इससे यह संदेश जरूर जाता है कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
    शंकराचार्य ने कहा कि छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, युवाओं के संगठित और लोकतांत्रिक आंदोलन ने यह साबित किया है कि जनदबाव से शासन-प्रशासन को निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत बताया।

    गौरक्षा यात्रा का जिक्र करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोगों से संवाद के दौरान उन्होंने महसूस किया कि समाज गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि गौ संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों को सही साबित करना चाहती है तो गौशालाओं और गौआश्रय केंद्रों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार पिछले कुछ महीनों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करे, ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कई गौआश्रय केंद्रों में व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं और गौवंश की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उनका कहना था कि केवल योजनाओं और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार दिखाई देना चाहिए।

    शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि उनकी गौरक्षा यात्रा के दौरान आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों के घरों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई और उन्हें बाहर निकलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से गौ संरक्षण की नीतियों को और प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की।

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