पिता की सीख याद कर भावुक हुए सचिन तेंदुलकर, छात्रों से बोले— "धोखा नहीं, मेहनत पर भरोसा रखें"
परीक्षा विवाद के बीच सचिन तेंदुलकर की दो टूक, कहा— "ईमानदारी से बढ़कर कुछ नहीं"नई दिल्ली :- देश में छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस के बीच क्रिकेट के महान खिलाड़ी और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने युवाओं के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेहनत और ईमानदारी ही सफलता का सही रास्ता है, जबकि शॉर्टकट और धोखाधड़ी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते।सचिन ने अपने दिवंगत पिता एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर को याद करते हुए बताया कि बचपन से उन्हें एक मूलभूत सीख दी गई थी। उन्होंने कहा, "मेरे पिता हमेशा कहते थे कि असफल होना गलत नहीं है, लेकिन किसी को धोखा देना कभी सही नहीं हो सकता। जीवन में कभी भी शॉर्टकट का सहारा मत लेना।"
उन्होंने कहा कि यदि समाज केवल परिणामों को महत्व देगा और मेहनत, ईमानदारी तथा प्रक्रिया की अनदेखी करेगा, तो गलत तरीकों को बढ़ावा मिलने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे माहौल में मेहनत करने वाले छात्रों का निराश होना स्वाभाविक है, क्योंकि उन्हें लग सकता है कि उनके प्रयासों के साथ न्याय नहीं हुआ।
सचिन ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। उनके सपने, उनकी मेहनत और उनकी ऊर्जा ही देश के भविष्य की नींव हैं। इसलिए यह केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों, प्रशासन और पूरे समाज का दायित्व है कि युवाओं का भरोसा बनाए रखें और उन्हें निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराएं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां ईमानदारी और कड़ी मेहनत का सम्मान हो, प्रतिभा को उसका उचित स्थान मिले और किसी भी तरह की अनियमितता या धोखाधड़ी के लिए कोई जगह न हो।
सचिन ने विश्वास जताया कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर ऐसे प्रभावी कदम उठाएंगे, जिनसे छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा और उनके सपनों को नई दिशा मिलेगी।


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