वाराणसी में ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां तेज, जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर बैठकों का दौर; 26 अगस्त को मनाया जाएगा जश्न
वाराणसी :- ईद मिलादुन्नबी के जश्न को लेकर वाराणसी में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। अलग-अलग अंजुमनों की ओर से सजावट, जुलूस के आयोजन और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आयोजकों का प्रयास है कि सभी अंजुमन एकजुट होकर अमन, भाईचारे और मिल्लत के संदेश के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालें।
सदर काजी-ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने फाटक शेख सलीम में आयोजित बैठक के बाद बताया कि जुलूस के आयोजन और शहर में होने वाली सजावट को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी अंजुमनों के बीच समन्वय स्थापित कर जश्न को बेहतर और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की कोशिश की जा रही है।
26 अगस्त को मनाया जाएगा ईद मिलादुन्नबी का जश्न
रबीउल अव्वल की 12वीं तारीख को ईद मिलादुन्नबी का मुख्य जश्न मनाया जाएगा। इस बार नबी की पैदाइश का जश्न 26 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि कार्यक्रमों का सिलसिला एक दिन पहले यानी 25 अगस्त से ही शुरू हो जाएगा।
11 रबीउल अव्वल की रात मस्जिदों और विभिन्न स्थानों पर नातिया कलाम से माहौल गुलजार होगा। 12 रबीउल अव्वल को जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाएगा। वहीं 25 अगस्त को मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से हड़हासराय से जुलूस निकाला जाएगा। इस दौरान विभिन्न अंजुमनों की ओर से नातिया कलाम पेश किए जाएंगे।
क्या है ईद मिलादुन्नबी
ईद मिलादुन्नबी पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की खुशी में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। मुस्लिम समाज में इस दिन को अकीदत, मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत के संदेश से जोड़कर देखा जाता है।
इस अवसर पर मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है। मिलाद, जलसे, नातिया मुशायरे और जुलूस जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और उनकी शिक्षाओं पर रोशनी डाली जाती है। कुरआन की तिलावत के साथ दरूद-ओ-सलाम भी पेश किया जाता है।रबीउल अव्वल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना है और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है। इस महीने की 12वीं तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की याद में मिलाद के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
महीनों पहले शुरू हो जाती है तैयारियां
ईद मिलादुन्नबी के आयोजन की तैयारियां कई स्थानों पर पहले से शुरू कर दी जाती हैं। किस स्थान पर जलसा होगा, किन उलेमा की तकरीर होगी, कौन-कौन सी अंजुमन नातिया कलाम पेश करेगी और कहां अंजुमनों का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसकी रूपरेखा पहले ही तैयार की जाती है।
वाराणसी में भी रबीउल अव्वल की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों में जिक्र-ए-नबी का सिलसिला शुरू हो गया है। अलग-अलग मोहल्लों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सजावट की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं।
गरीबों और जरूरतमंदों की मदद का संदेश
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने की परंपरा भी देखने को मिलती है। कई स्थानों पर लोगों को भोजन कराया जाता है और मिठाइयां बांटी जाती हैं।
आयोजकों के अनुसार, इस अवसर का उद्देश्य केवल जश्न मनाना नहीं बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं—मोहब्बत, रहमत, इंसाफ, भाईचारे और इंसानियत—को याद करना और समाज में इन मूल्यों को मजबूत करना भी है।
जश्न की तैयारियों में जुटीं बनारस की प्रमुख अंजुमनें
वाराणसी की कई प्रमुख अंजुमनें ईद मिलादुन्नबी के कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटी हैं। इनमें अंजुमन तबलीग अहले सुन्नत व दावते नमाज, अंजुमन मरकजी दावते इस्लामी, अंजुमन दावते इस्लामी, अंजुमन मरकजी यौमुन्नबी कमेटी, सेंट्रल यौमुन्नबी कमेटी, अंजुमन अलविया, अंजुमन फलाहे दीन, अंजुमन गुलामाने वारिस, अंजुमन फलाहे मिल्लत, अंजुमन तकरीबाते इस्लाम, अंजुमन मुहिब्बाने अहले बैत, अंजुमन इलाहिया, अंजुमन मोहिब्बाने रसूल, अंजुमन शाहीन-ए-इस्लाम, अंजुमन चरागे इस्लाम, अंजुमन बज्मे अनवारे सूफिया, अंजुमन फारूकिया, अंजुमन गुलशने रसूल, अंजुमन कारवाने हरम, अंजुमन मुजाहिदीन-ए-इस्लाम, अंजुमन अस्हाबा-ए-मोहम्मद, अंजुमन इरफानिया, अंजुमन इस्लातुल इस्लाम, अंजुमन गुलामाने सहाबा, अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा, अंजुमन शाहे मदीना, अंजुमन सुन्नते रसूल और अंजुमन पंजतन पाक समेत अन्य अंजुमनें शामिल हैं।
जैसे-जैसे 12 रबीउल अव्वल का दिन नजदीक आ रहा है, शहर में जुलूस और सजावट को लेकर तैयारियां भी तेज होती जा रही हैं। कमेटियों की कोशिश है कि जश्न-ए-मिलादुन्नबी का आयोजन अमन, सौहार्द और भाईचारे के माहौल में संपन्न हो।


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