• Breaking News

    यूपी में निजी कंपनियां भी बनाएंगी बिजनेस पार्क, 45 साल की लीज पर मिलेगी जमीन; युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

    उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में योगी सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब निजी कंपनियां और निवेशक बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगे। सरकार ने इसके लिए निजी बिजनेस पार्क नीति लागू की है। नीति में जमीन उपलब्ध कराने से लेकर परियोजना की मंजूरी और निवेशकों को प्रोत्साहन देने तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

    सरकार का उद्देश्य प्रदेश में ऐसे बिजनेस हब विकसित करना है, जहां आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), नॉलेज बेस्ड सर्विस यूनिट, रिटेल और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां एक ही परिसर में संचालित हो सकें। इससे निवेश के साथ रोजगार और स्थानीय कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    45 साल की लीज पर उपलब्ध होगी जमीन

    नई नीति के तहत पात्र निजी डेवलपर्स को बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए जमीन 45 साल की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। पात्रता और जरूरत के आधार पर लीज अवधि को आगे 45 साल के लिए बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है। लंबी अवधि की लीज से निवेशकों को बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने और उन्हें लंबे समय तक संचालित करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    कौन कर सकेगा बिजनेस पार्क का विकास?

    नीति के तहत बिजनेस कंसोर्टियम, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REIT और सूचीबद्ध कंपनियां बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगी। इसके लिए वित्तीय क्षमता और संबंधित क्षेत्र में अनुभव को भी आधार बनाया गया है।

    पात्रता के लिए कंपनी या कंसोर्टियम की न्यूनतम नेटवर्थ 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना जरूरी होगा। रियल एस्टेट डेवलपमेंट या कमर्शियल बिजनेस के क्षेत्र में कम से कम सात साल का अनुभव रखने वाले समूहों को भी नीति के तहत पात्रता दी गई है।

    कम से कम 10 एकड़ में विकसित होगा पार्क

    प्रस्तावित बिजनेस पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 एकड़ निर्धारित किया गया है। जरूरत के अनुसार परियोजना को 20 से 30 एकड़ तक के क्षेत्र में भी विकसित किया जा सकेगा। पार्क के भीतर जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी नीति में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

    कम से कम 50 प्रतिशत क्षेत्र आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और नॉलेज बेस्ड सर्विस यूनिट्स के लिए निर्धारित रहेगा। वहीं अधिकतम 10 प्रतिशत क्षेत्र में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट और कर्मचारियों तथा आगंतुकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।

    ऑफिस के साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर

    सरकार ने बिजनेस पार्क को केवल कार्यालयों का परिसर बनाने के बजाय रोजगार और कौशल विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। पार्क में ट्रेनिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकेंगी।

    इन केंद्रों के जरिए कंपनियों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे स्थानीय युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल हासिल करने और रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    सरकार चिन्हित करेगी जमीन, नीलामी से मिलेगा अवसर

    निजी बिजनेस पार्क के लिए सरकार उपयुक्त जमीन चिन्हित करेगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से डेवलपर्स को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    निवेशकों को अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने में परेशानी न हो, इसके लिए सिंगल विंडो व्यवस्था के जरिए आवश्यक अनुमोदन और स्वीकृतियां उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जमीन के रजिस्ट्रेशन पर डेवलपर कंपनी को स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट देने की व्यवस्था भी नीति में शामिल है।

    तीन साल में पूरा करना होगा विकास कार्य

    10 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित बिजनेस पार्क को अधिकतम तीन साल के भीतर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के लिए डेवलपर को निर्धारित भवन निर्माण उपविधियों के अनुसार लेआउट, आर्किटेक्चर और डिजाइन तैयार करना होगा।

    इसके साथ ही परियोजना से संबंधित जरूरी एनओसी, परमिट और अन्य विभागीय स्वीकृतियां हासिल करने की जिम्मेदारी भी डेवलपर की होगी।

    निजी निवेश बढ़ने से रोजगार को मिल सकती है रफ्तार

    महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बिजनेस पार्क और इसी तरह के व्यावसायिक केंद्रों के जरिए निवेश तथा रोजगार को बढ़ावा दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश सरकार भी निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर इस मॉडल को प्रदेश में विस्तार देने की कोशिश कर रही है।

    यदि नीति के तहत प्रस्तावित बिजनेस पार्क तेजी से जमीन पर उतरते हैं, तो उत्तर प्रदेश में आईटी, कॉरपोरेट और नॉलेज आधारित उद्योगों के लिए नया इकोसिस्टम तैयार हो सकता है। इसके साथ ही युवाओं के लिए प्रशिक्षण, रोजगार और नए व्यवसायिक अवसर बढ़ने की संभावना है।


    No comments

    Post Top Ad

    Post Bottom Ad