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    Varanasi: 20 साल तक सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा माओवादी गंझू, 50 से अधिक मुकदमे दर्ज

    वाराणसी में 30 लाख इनामी माओवादी बृजेश गंझू मुठभेड़ में ढेर, 20 साल से था फरार
    • राधिका तिवारी
    वाराणसी :- प्रतिबंधित माओवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के प्रमुख बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरदार जी की मुठभेड़ में मौत के बाद कई जानकार‍ियां सामने आई हैं।
    बृजेश लगभग 20 वर्षों से फरार था और झारखंड पुलिस तथा एनआईए ने उसके खिलाफ कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, आगजनी, आपराधिक षड्यंत्र और लोकसेवकों पर हमले समेत 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनमें आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले भी शामिल हैं। इस मुठभेड़ में शामिल एटीएस की टीम को डीजीपी राजीव कृष्ण ने 2 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
    यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि झारखंड के नक्सली उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले हैं। बृजेश गंझू भेष बदलकर विभिन्न राज्यों में छिपा हुआ था और अपने साथी के साथ वाराणसी की ओर आ रहा था। इस सूचना के आधार पर एटीएस की टीमों को वाराणसी से जुड़े मीरजापुर और सोनभद्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय किया गया।
    20 सितंबर की भोर में एटीएस को जानकारी मिली कि बृजेश वाराणसी में प्रवेश कर चुका है और रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान की ओर बढ़ रहा है। एटीएस की टीमें लंका मैदान के आस-पास तैनात हो गईं। इसी दौरान जीटी रोड की तरफ से एक मोटरसाइकिल पर दो लोग आते दिखाई दिए। जब उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, तो मोटरसाइकिल सवारों ने एटीएस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
    मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी एसपी विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी नितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी, लेकिन दोनों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बच गई। जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू को भी गोली लगी और उसका दूसरा साथी मौके से भाग निकला। घायल बृजेश को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
    बृजेश गंझू पर 25 लाख रुपये का इनाम झारखंड पुलिस और 5 लाख रुपये का इनाम एनआईए ने जारी किया था। वह एनआईए के केस में भी वांछित था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र, रंगदारी, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लोकसेवकों पर हमला करने, अवैध हथियार और विस्फोटक रखने से जुड़े 50 से अधिक मामले दर्ज थे। बृजेश के खिलाफ यूए(पी)ए यानि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं में भी मुकदमे दर्ज थे।

    बृजेश पहले सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था और बाद में टीएसपीसी का प्रमुख बनकर हिंसक नक्सली गतिविधियों में सक्रिय हो गया। मुठभेड़ के बाद मौके से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, भारी मात्रा में कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए। यूपी एटीएस इससे पहले टीएसपीसी के सब-जोनल कमांडर उमेश उर्फ नगीना को भी गिरफ्तार कर चुकी है, जिस पर झारखंड से पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।

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