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    जिस BHU में पढ़कर हासिल की पीएचडी, अब वहीं पढ़ाएंगी डॉ. श्वेता पांडेय, फतेहपुर की बेटी ने रचा सफलता का नया अध्याय

    डॉ श्वेता पाण्डेय

    • राधिका तिवारी

    योगापट्टी प्रखंड के फतेहपुर गांव की बेटी डॉ. श्वेता पांडेय ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इतिहास विभाग में उनका चयन सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ है। खास बात यह है कि जिस विश्वविद्यालय में उन्होंने स्नातक से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई पूरी की, अब उसी प्रतिष्ठित संस्थान में वह शिक्षक की भूमिका निभाएंगी। उनकी इस उपलब्धि से फतेहपुर गांव समेत पूरे पश्चिम चंपारण में खुशी का माहौल है।

    योगापट्टी से शुरू हुआ सफर BHU तक पहुंचा

    डॉ. श्वेता पांडेय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा योगापट्टी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से हासिल की। पढ़ाई के प्रति शुरू से ही गंभीर और मेधावी रहीं श्वेता ने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के एमडीडीएम कॉलेज से प्रथम श्रेणी में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।

    उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय का रुख किया। यहां इतिहास विषय से बीए ऑनर्स और एमए की पढ़ाई प्रथम श्रेणी के साथ पूरी की। इसके बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

    अब उसी विश्वविद्यालय में देंगी शिक्षा

    शैक्षणिक सफर में लगातार आगे बढ़ते हुए डॉ. श्वेता पांडेय का चयन अब BHU के इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि जिस संस्थान में उन्होंने विद्यार्थी के रूप में वर्षों अध्ययन और शोध किया, अब वहीं वह विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाएंगी।

    उनके चयन की खबर मिलते ही फतेहपुर गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

    डॉ. श्वेता पांडेय के पिता अखिलेश्वर पांडेय व्यवसायी हैं, जबकि उनकी मां पुष्पा पांडेय गृहिणी हैं। श्वेता अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को देती हैं।

    ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर बनने तक का उनका सफर क्षेत्र की छात्राओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। श्वेता की उपलब्धि ने यह भी साबित किया है कि मजबूत संकल्प, निरंतर मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण के दम पर छोटे गांव से निकलकर भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।


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