यूपी में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन: 31 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन रद्द, रिकॉर्ड में मिलीं भारी गड़बड़ियां
- मोहम्मद रिजवान
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के सत्यापन अभियान के तहत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। उम्मीद (UMEED) पोर्टल पर दर्ज 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। जांच में दस्तावेजों की खामियां, खसरा नंबरों में विसंगतियां, राजस्व अभिलेखों से मेल न खाने वाले रिकॉर्ड और भूमि विवरण में अंतर मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 1,18,302 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 31,328 संपत्तियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, जबकि 31,192 संपत्तियों पर किए गए वक्फ दावे भी खारिज कर दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि सत्यापन के दौरान कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया।
उम्मीद पोर्टल पर चल रहा व्यापक सत्यापन अभियान
राज्य सरकार ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन के लिए UMEED (Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development) पोर्टल शुरू किया था। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करना, फर्जी दावों की पहचान करना, अवैध कब्जों पर रोक लगाना और राजस्व अभिलेखों से मिलान सुनिश्चित करना था।
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आने के बाद अधिकारियों ने रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की, जिसमें कई गंभीर कमियां उजागर हुईं।
खसरा नंबर और राजस्व रिकॉर्ड में मिला बड़ा अंतर
जांच में पाया गया कि कई संपत्तियों के खसरा नंबर वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड और राजस्व विभाग के अभिलेखों में अलग-अलग दर्ज थे। कुछ मामलों में जिस भूमि को वक्फ संपत्ति बताया गया था, वह सरकारी रिकॉर्ड में किसी अन्य श्रेणी में दर्ज मिली।
अधिकारियों के अनुसार कई दस्तावेज अधूरे थे, भूमि स्वामित्व संबंधी जानकारी स्पष्ट नहीं थी और तकनीकी त्रुटियां भी बड़ी संख्या में पाई गईं।
जमीन के रकबे में भी सामने आईं विसंगतियां
सत्यापन के दौरान कई संपत्तियों के वास्तविक क्षेत्रफल और रिकॉर्ड में दर्ज रकबे में अंतर पाया गया। कहीं जमीन का क्षेत्रफल अधिक तो कहीं कम दर्ज मिला। कई संपत्तियों की सीमाएं भी स्पष्ट नहीं थीं। प्रशासन ने इन्हें गंभीर अनियमितता मानते हुए पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की।
डिजिटल रजिस्ट्रेशन में यूपी देश में अव्वल
विवादों के बीच उत्तर प्रदेश ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य सरकार के अनुसार दिसंबर 2025 तक 92,832 वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन पंजीकरण पूरा कर लिया गया था, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा से पहले पूरा किया गया।
केंद्र सरकार के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 6 जून 2025 को सभी राज्यों को वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 5 दिसंबर 2025 तक की समयसीमा तय की गई थी। बाद में राज्यों को अतिरिक्त छह माह का समय दिया गया, लेकिन उत्तर प्रदेश ने तय अवधि से पहले ही प्रक्रिया पूरी कर ली।
वाराणसी समेत कई जिलों में जांच जारी
प्रदेश के कई जिलों में अभी भी वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड का सत्यापन जारी है। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी और मेरठ समेत कई शहरों में राजस्व विभाग और वक्फ बोर्ड की संयुक्त टीमें दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
सरकार का दावा—बढ़ेगी पारदर्शिता, घटेंगे विवाद
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह रिकॉर्ड सत्यापन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। उनका दावा है कि इससे फर्जी दावों पर रोक लगेगी, भूमि विवाद कम होंगे और वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड अधिक सटीक एवं पारदर्शी बन सकेगा।

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