वाराणसी में ईरानी प्रतिनिधि का बयान: "परमाणु हथियार इस्लाम में निषिद्ध, ईरान का बम बनाने का इरादा नहीं"
वाराणसी पहुंचे ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने परमाणु हथियारों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं है और न ही भविष्य में उसे विकसित करने की कोई योजना है। उनके अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनई ने वर्षों पहले स्पष्ट फतवा जारी कर परमाणु हथियारों को इस्लामिक दृष्टि से प्रतिबंधित बताया था।
शनिवार को इमानिया अरबी कॉलेज और दरगाह फातमान में आयोजित एक ताजियाती कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट कर चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सैन्य नहीं बल्कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आदेश के बाद परमाणु बम बनाना या रखना ईरान की नीति का हिस्सा नहीं हो सकता।
ईरान के हालात पर बोले- जनता देश के साथ खड़ी
ईरान की मौजूदा स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद देश के लोग एकजुट हैं और अपने राष्ट्र के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद जनता का मनोबल ऊंचा है और लोग शांति बहाली की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना गलत
होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह मार्ग सदियों से वैश्विक व्यापार के लिए खुला रहा है और दुनिया के अनेक देशों को इससे लाभ मिलता रहा है। उनका कहना था कि हालिया तनाव के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट के कारणों को समझने के लिए उन घटनाओं और पक्षों को देखना होगा जिनसे क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति बनी।
प्रतिबंधों के बावजूद आत्मनिर्भरता की राह पर ईरान
डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान दशकों से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद ईरानी जनता देश की स्वतंत्र नीतियों और राष्ट्रीय हितों के लिए कठिनाइयों को सहने के लिए तैयार है।
"वाराणसी आध्यात्म, दर्शन और सांस्कृतिक एकता की नगरी"
वाराणसी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां ईरान समेत कई देशों के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते हैं, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाता है।
भारत-ईरान संबंधों को बताया हजारों साल पुराना
भारत और ईरान के संबंधों पर बोलते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा, दर्शन और व्यापार की साझा विरासत पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से सहयोग और संवाद की परंपरा रही है, जो आज भी मजबूत बनी हुई है।
कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और शहर मुफ्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।



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