ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में वाराणसी में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को हुई भारी परेशानी
वाराणसी :- ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में बुधवार को वाराणसी में दवा कारोबारियों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। शहर के प्रमुख मेडिकल बाजारों और मोहल्लों में अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोग डॉक्टर की पर्ची लेकर घंटों दवाइयों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस बंदी को दवा विक्रेता समिति वाराणसी का भी समर्थन मिला। सप्तसागर दवा मंडी, लंका, भेलूपुर, लहुराबीर, कबीरचौरा सहित शहर के कई इलाकों में मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद दिखाई दिए। बंदी का असर अस्पतालों और क्लीनिकों के आसपास भी देखने को मिला, जहां मरीजों के तीमारदार जरूरी दवाओं के लिए परेशान रहे।
दवा विक्रेता समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक दवा व्यापार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर छोटे और मध्यम दवा व्यापारियों के सामने संकट खड़ा कर रही हैं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री में गलत दवा, एक्सपायरी दवा या बिना डॉक्टर के पर्चे पर दवाएं मिलने का खतरा बढ़ जाता है, जो मरीजों की सेहत के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
समिति के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि वाराणसी जिले में करीब पांच हजार दवा दुकानें संचालित हैं और सप्तसागर दवा मंडी पूर्वांचल के कई जिलों के दवा कारोबार का प्रमुख केंद्र है। बंदी को सफल बनाने के लिए पहले से ही व्यापारियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
दवा व्यापारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने GSR 817 और कोरोना काल में लागू GSR 220 अधिसूचनाओं को समाप्त करने की भी मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि बिना मजबूत नियामक व्यवस्था के ऑनलाइन दवा कारोबार को बढ़ावा देना पारंपरिक व्यापार और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हड़ताल के कारण शहर की हजारों थोक और फुटकर दवा दुकानें बंद रहीं। ऐसे में लोगों से अपील की गई कि जरूरी दवाओं की व्यवस्था पहले से कर लें, ताकि किसी आपात स्थिति में परेशानी का सामना न करना पड़े।



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