वाराणसी के दालमंडी भवन ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट की बड़ी राहत, VDA की कार्रवाई पर लगाई रोक
वाराणसी/प्रयागराज :- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में भवन ध्वस्तीकरण को लेकर वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि संबंधित मकान मालिकों की आपत्तियां सुनने और उनका निस्तारण करने से पहले कोई भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने परवीन फातिमा समेत चार लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत 14 मई 2026 को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे दालमंडी स्थित मकान संख्या सीके 39/2, वार्ड चौक, वाराणसी के वैध मालिक हैं और लंबे समय से वहां रह रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि भवन काफी पुराना है और अब तक निर्माण को लेकर कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी। साथ ही आरोप लगाया कि प्राधिकरण मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रहा है, जिससे उन्हें अधिग्रहित संपत्ति का उचित मुआवजा न देना पड़े।
वहीं VDA की ओर से कोर्ट में कहा गया कि याचिका समय से पहले दाखिल की गई है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने अभी तक धारा 27(2) के तहत अपनी औपचारिक आपत्तियां प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत नहीं की हैं। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि यदि आपत्तियां दाखिल की जाती हैं तो उन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण कर दिया।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां और आदेश की प्रमाणित प्रति VDA के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद VDA के उपाध्यक्ष तीन सप्ताह के भीतर नियमानुसार निर्णय लेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में आपत्तियां दाखिल नहीं की जाती हैं तो प्राधिकरण कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

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