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    वाराणसी में फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट का पर्दाफाश: शादी कराने के नाम पर साइबर ठगी, 10 महिलाएं गिरफ्तार

    वाराणसी :- ऑपरेशन "साइबर वज्र" के तहत वाराणसी पुलिस ने कैंट क्षेत्र में संचालित एक फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए रैकेट की मास्टरमाइंड समेत 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 27 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, बैंक दस्तावेज, क्यूआर कोड, चेकबुक, डेबिट कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा करीब ₹10 लाख की साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है।
    मैट्रिमोनियल ब्यूरो की आड़ में चल रहा था खेल

    कैंट थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सोमवार शाम अर्दली बाजार स्थित विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के एक फ्लैट पर छापेमारी की। यहां तीन कमरों में फर्जी मैट्रिमोनियल ब्यूरो संचालित किया जा रहा था, जहां महिलाएं मोबाइल और कीपैड फोन के जरिए देशभर के लोगों से संपर्क कर शादी कराने का झांसा देकर पैसे वसूल रही थीं।

    अखबारों में विज्ञापन देकर फंसाते थे लोग

    पुलिस के अनुसार, गिरोह की सरगना रागिनी देवी अखबारों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराती थी। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों से "लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन" के नाम पर सदस्यता शुल्क लिया जाता था। इसके बाद व्हाट्सऐप पर युवक-युवतियों की प्रोफाइल भेजी जाती थी, लेकिन वास्तविक परिवारों का संपर्क कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता था।

    50 से अधिक शिकायतों के बाद खुला राज

    इस फर्जीवाड़े को लेकर पुलिस और साइबर थाने में 50 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि पैसे लेने के बाद न तो रिश्ता कराया गया और न ही रकम लौटाई गई। लगातार शिकायतें मिलने पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की।

    प्रतिबिंब और NCRP पोर्टल से मिला सुराग

    डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल और एनसीआरपी पोर्टल पर दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं। जांच में पता चला कि इन्हीं नंबरों के जरिए देशभर के लोगों से संपर्क कर ठगी की जा रही थी।

    व्हाट्सऐप पर भेजते थे फर्जी प्रोफाइल

    गिरोह के सदस्य खुद को मैट्रिमोनियल कंपनी का प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सऐप पर प्रोफाइल भेजते थे और परिवार का संपर्क उपलब्ध कराने के नाम पर सदस्यता शुल्क जमा कराते थे। एक महिला से चार किस्तों में ₹7,000, जबकि दूसरे पीड़ित से ₹3,500 वसूले गए, लेकिन किसी को भी वास्तविक रिश्ता नहीं दिलाया गया।

    छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद

    पुलिस ने मौके से 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण संबंधी दस्तावेज, मैट्रिमोनियल रजिस्ट्रेशन फॉर्म, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक पासबुक और पांच डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।

    पूछताछ में रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को सदस्यता लेने के लिए प्रेरित किया जाता था। पुलिस के अनुसार, साइबर शिकायतों के चलते कुछ बैंक खाते फ्रीज होने के बाद गिरोह ने अन्य बैंक खातों और अलग-अलग क्यूआर कोड के जरिए भी रकम वसूलनी शुरू कर दी थी।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

    गिरफ्तार सभी महिलाएं कैंट, शिवपुर और लालपुर थाना क्षेत्रों की रहने वाली हैं। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 3(5), 319(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके और देशभर में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क का भी खुलासा हो सके।


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