'लब्बैक या हुसैन' की सदाओं के बीच निकला 18 बनी हाशिम का जुलूस, दरगाह फातमान में उमड़ी भीड़
वाराणसी :- मोहर्रम की अजादारी के सिलसिले में रविवार को दरगाह फातमान से 18 बनी हाशिम का पारंपरिक जुलूस पूरे अकीदत और गमगीन माहौल में निकाला गया। करबला के शहीदों, विशेष रूप से इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके खानदान के 18 शहीदों की याद में निकले इस जुलूस में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए। पूरे परिसर में "लब्बैक या हुसैन" और "या अब्बास" की सदाएं गूंजती रहीं।जुलूस के दौरान एक-एक कर 18 ताबूत अकीदतमंदों के बीच लाए गए, जिनकी लोगों ने श्रद्धापूर्वक जियारत की। इसके साथ ही हजरत अब्बास का अलम, तुर्बत और इमाम हुसैन की सवारी 'दुलदुल' भी मौजूद रही। जायरीनों ने दुलदुल, अलम और तुर्बत की जियारत कर अपनी मन्नतें मांगी। यह जुलूस अंजुमन हैदरी चौक के जेरे-इंतजाम निकाला गया, जो देर शाम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।मौलाना अकील हुसैनी ने बयान की करबला की शहादतजुलूस शुरू होने से पहले ईमानिया अरबी कॉलेज के मौलाना सैयद अकील हुसैनी ने मजलिस को खिताब करते हुए करबला के शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया। उन्होंने हजरत अब्बास (अ.स.) की शहादत का मार्मिक बयान करते हुए कहा कि करबला में इमाम हुसैन के खेमों में तीन दिनों से बच्चे प्यासे थे। जब चार वर्षीय बीबी सकीना ने अपने चचा हजरत अब्बास से पानी लाने की गुजारिश की, तब वह इमाम हुसैन से इजाजत लेकर फरात नदी की ओर गए। पानी लेकर लौटते समय यजीदी सेना ने उन पर हमला कर दिया और बहादुरी से लड़ते हुए हजरत अब्बास शहीद हो गए।अली अकबर की शहादत का जिक्र सुन छलक पड़े आंसूमौलाना अकील हुसैनी ने इमाम हुसैन के जवान बेटे हजरत अली अकबर की शहादत का बयान किया तो मजलिस में मौजूद अकीदतमंद भावुक हो उठे। करबला की दर्दनाक दास्तान सुनकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं। मजलिस के बाद मौलाना इंतजार आब्दी ने 18 बनी हाशिम के ताबूतों का परिचय कराया।
एक-एक कर निकले 18 बनी हाशिम के ताबूत
मजलिस के बाद सबसे पहले जनाब मुस्लिम की तुर्बत लाई गई, जिसकी जायरीनों ने जियारत की। इसके बाद क्रमवार सभी 18 ताबूत निकाले गए। अंत में इमाम हुसैन की तुर्बत और उनकी सवारी 'दुलदुल' लाई गई, जिसकी जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
करबला की कुर्बानी आज भी इंसानियत के लिए मिसाल
मौलाना अकील हुसैनी ने कहा कि करबला की जंग में इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ उनके 72 वफादार साथियों ने इंसानियत, न्याय और सत्य की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। इन शहीदों में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के खानदान के 18 अफराद भी शामिल थे। इन्हीं 18 बनी हाशिम की याद में हर वर्ष यह पारंपरिक जुलूस निकाला जाता है।
करबला में शहीद हुए 18 बनी हाशिम
- 1. इमाम हुसैन बिन अली
- 2. हजरत अब्बास बिन अली
- 3. उस्मान बिन अली
- 4. जाफर बिन अली
- 5. अब्दुल्लाह बिन अली
- 6. मुहम्मद बिन अली
- 7. कासिम बिन हसन
- 8. अब्दुल्लाह बिन हसन
- 9. अबू बक्र बिन हसन
- 10. अली अकबर बिन हुसैन
- 11. अली असगर बिन हुसैन
- 12. औन बिन अब्दुल्लाह बिन जाफर
- 13. मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन जाफर
- 14. अब्दुर्रहमान बिन अकील
- 15. जाफर बिन अकील
- 16. अब्दुल्लाह बिन अकील
- 17. अबू अब्दुल्ला अमीर बिन मुस्लिम
- 18. अब्दुल्लाह बिन मुस्लिम






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