काशी के आर्यन दुबे ने रचा इतिहास, नीट 2026 में ऑल इंडिया 7वीं और यूपी में पहली रैंक हासिल
वाराणसी :- काशी के होनहार छात्र आर्यन दुबे ने नीट (यूजी) 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में सातवीं और उत्तर प्रदेश में पहली रैंक हासिल कर वाराणसी का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने 720 में से 710 अंक प्राप्त कर देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है।
आर्यन, आईआईटी-बीएचयू के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं पूर्व डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. विकास कुमार दुबे के पुत्र हैं। उनका लक्ष्य एम्स, नई दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई कर आगे चलकर एक सफल न्यूरोसर्जन और चिकित्सा शोधकर्ता बनना है।
नीट से पहले आर्यन ने जेईई मेन में भी 99.699 पर्सेंटाइल हासिल किया था, लेकिन उन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय मेडिकल क्षेत्र को अपना भविष्य चुना। उनकी सफलता कई वर्षों की अनुशासित तैयारी और निरंतर मेहनत का परिणाम है।
दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई करने वाले आर्यन शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया था, जबकि इंटरमीडिएट में 98.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विज्ञान वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया।
तैयारी के दौरान वह कोचिंग के अलावा प्रतिदिन सात से आठ घंटे स्वयं अध्ययन करते थे। आर्यन अपनी सफलता का श्रेय माता डॉ. मोनू पांडेय, पिता प्रो. विकास कुमार दुबे, आकाश संस्थान के शिक्षकों तथा फिजिक्स के मार्गदर्शक आरिफ खान को देते हैं।
दादा से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा
आर्यन बताते हैं कि डॉक्टर बनने का सपना उन्हें अपने दादाजी से मिला, जो स्वयं एक सेवानिवृत्त सर्जन हैं। परिवार का यह चिकित्सकीय माहौल उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना।
बेटे के भविष्य के लिए मां ने करियर को दी प्राथमिकता
आर्यन की मां डॉ. मोनू पांडेय ने आईएमएस-बीएचयू से मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में पीएचडी करने के बाद वैज्ञानिक के रूप में करियर शुरू किया था। हालांकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने कुछ समय के लिए अपने पेशेवर जीवन से दूरी बना ली।
परीक्षा रद्द होने के बाद भी नहीं टूटा हौसला
पहले आयोजित नीट परीक्षा रद्द होने से आर्यन कुछ समय के लिए निराश जरूर हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने दोबारा तैयारी की और इस बार देश की शीर्ष रैंक हासिल कर अपनी क्षमता साबित कर दी।
आर्यन के पिता ने बताया कि दोबारा परीक्षा की तैयारी में कोचिंग संस्थान की पूरी टीम और शिक्षकों ने उनका मनोबल बढ़ाया। खासतौर पर फिजिक्स में मिले मार्गदर्शन का बड़ा योगदान रहा। इस बार उन्होंने फिजिक्स और केमिस्ट्री में पूरे अंक हासिल किए, जबकि केवल बायोलॉजी में दो प्रश्न गलत हुए।
टाई-ब्रेक नियम से मिली सातवीं रैंक
नीट 2026 के परिणाम में चौथी से सातवीं रैंक तक कई अभ्यर्थियों के अंक समान रहे। हालांकि निर्धारित टाई-ब्रेक नियम के आधार पर आर्यन को ऑल इंडिया सातवीं रैंक मिली, जबकि उत्तर प्रदेश में वह शीर्ष स्थान पर रहे।

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