वाराणसी में उठा 72 ताबूतों का ऐतिहासिक जुलूस, 'या हुसैन' की सदाओं से गूंजा सदर इमामबाड़ा, हजारों जायरीन ने की जियारत, देखे वीडियो
वाराणसी :- मुहर्रम की अकीदत भरी रस्मों के बीच रविवार शाम लाट सरैया स्थित सदर इमामबाड़े से 72 ताबूतों का पारंपरिक और ऐतिहासिक जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में शहर की विभिन्न अंजुमनों ने हिस्सा लिया, जबकि 5 हजार से अधिक जायरीन ने शिरकत कर इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। एक साथ 72 ताबूत जब इमामबाड़े के मैदान में पहुंचे तो पूरा परिसर "या हुसैन" की सदाओं से गूंज उठा और माहौल गमगीन हो गया।जुलूस से पहले तिलावत-ए-कुरआन के बाद शायर काविश बनारसी, एरम बनारसी और सलीम बलरामपुरी ने अपने कलाम पेश किए। इसके बाद मुजफ्फरनगर से आए मौलाना सैयद मोहम्मद हुसैनी ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के वाकये और इमाम हुसैन के 71 वफादार साथियों की कुर्बानियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यजीद हर हाल में इमाम हुसैन को शहीद करना चाहता था और उसने सुबह की नमाज के वक्त पहला हमला कराया। उस कठिन घड़ी में कई सहाबियों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर इमाम हुसैन को नमाज अदा करने का अवसर दिया। मौलाना के बयान के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद जायरीन की आंखें नम हो गईं।मजलिस के बाद मेहमान नौहाख्वां जनाब अली मूसा ने दर्दभरे अंदाज में नौहाख्वानी की। इसके बाद अंजुमन जव्वादिया ने नौहा और मातम पेश किया। फिर आजमगढ़ से आए जनाब जीशान आजमी ने एक-एक कर 72 ताबूतों का तारूफ कराया। ताबूत बाहर लाए जाने के बाद जायरीन ने उनकी जियारत की और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया।जुलूस में 72 ताबूतों के साथ हजरत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े 'दुलदुल' की प्रतीकात्मक मौजूदगी और अलम भी आकर्षण का केंद्र रहे। पूरे आयोजन के दौरान अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ रस्मों में हिस्सा लिया। देर शाम करीब सात बजे जुलूस संपन्न हुआ।


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