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    9 जुलाई से शुरू होगा हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का 640वां सालाना उर्स, देश-विदेश से उमड़ेंगे लाखों जायरीन

    • मोहम्मद रिजवान
    अंबेडकरनगर।
    विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत सुल्तान सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का 640वां आठ दिवसीय सालाना उर्स इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 23 मुहर्रम (9 जुलाई 2026) से शुरू होकर 16 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान देश-विदेश से लाखों जायरीन अशरफपुर किछौछा स्थित दरगाह पहुंचकर चादर और अकीदत के फूल पेश करेंगे तथा मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगेंगे। उर्स को लेकर जिला प्रशासन और दरगाह इंतजामिया कमेटी ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

    जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर तथा बसखारी से करीब दो किलोमीटर उत्तर स्थित किछौछा शरीफ दरगाह देश के प्रमुख रूहानी केंद्रों में शुमार है। हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का जन्म 707 हिजरी (1286 ई.) में ईरान के सिमनान नगर में हुआ था। पिता के इंतकाल के बाद उन्होंने कुछ समय तक राजगद्दी संभाली, लेकिन सांसारिक वैभव का त्याग कर शासन अपने छोटे भाई को सौंप दिया और आध्यात्मिक जीवन अपना लिया। समरकंद, मुल्तान, दिल्ली, बिहार, बंगाल और जौनपुर की यात्राएं करते हुए वह किछौछा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेम, इंसानियत, मानव सेवा और सूफी विचारधारा का संदेश दिया। 808 हिजरी (1387 ई.) में उनके विसाल के बाद भी उनकी शिक्षाएं आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

    परचम कुशाई से होगा उर्स का आगाज

    उर्स का शुभारंभ 23 मुहर्रम (9 जुलाई) को मलंग गेट से खानवाद-ए-अशरफिया की ओर से परचम कुशाई की रस्म के साथ होगा। इसके बाद जुलूस दरगाह पहुंचकर चादरपोशी और फूल पेश करेगा तथा मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की जाएगी। उर्स के दौरान विभिन्न खानकाहों के सज्जादानशीन पारंपरिक रस्में अदा करेंगे।

    उर्स की तैयारियों को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी ईशा प्रिया और पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगी। सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    खिरकापोशी होगी सबसे बड़ा आकर्षण

    उर्स का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आयोजन 28 मुहर्रम (14 जुलाई) को होने वाली खिरकापोशी की रस्म होगी। इस अवसर पर लाखों जायरीन खिरका मुबारक और छड़ी मुबारक के दीदार कर अपनी मन्नतें मांगेंगे। यह रस्म उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण मानी जाती है।

    नीर शरीफ के जल में अटूट आस्था

    दरगाह परिसर स्थित नीर शरीफ के जल के प्रति भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे दिल और अकीदत से की गई दुआ इंसान को मानसिक सुकून देती है और जीवन की कठिनाइयों से उबरने का हौसला प्रदान करती है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों जायरीन कई दिनों तक दरगाह में ठहरकर इबादत करते हैं और रौजा-ए-मुबारक पर हाजिरी देकर बरकत हासिल करते हैं।

    640वें उर्स का प्रमुख कार्यक्रम

    • 23 मुहर्रम | 9 जुलाई 2026 — परचम कुशाई एवं उर्स का शुभारंभ
    • 25 मुहर्रम | 11 जुलाई 2026 — विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम
    • 26 मुहर्रम | 12 जुलाई 2026 — महफिल-ए-जिक्र व दुआ
    • 27 मुहर्रम | 13 जुलाई 2026 — रूहानी कार्यक्रम
    • 28 मुहर्रम | 14 जुलाई 2026 — ऐतिहासिक खिरकापोशी एवं खिरका मुबारक के दीदार

    अब इंतजार की घड़ियां समाप्त होने को हैं। किछौछा शरीफ एक बार फिर दुनिया भर से आने वाले जायरीनों के इस्तकबाल के लिए तैयार है। दुआ है कि अल्लाह तआला इस मुबारक मौके की बरकतें सबको नसीब फरमाए, मुल्क में अमन-ओ-अमान कायम रखे और सभी की जायज दुआओं को कबूल फरमाए। आमीन।



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