काशी में गूंजा 'हर-हर महादेव', सावन के पहले दिन सीएम योगी ने बाबा विश्वनाथ का किया जलाभिषेक और काल भैरव के किए दर्शन
वाराणसी :- श्रावण मास के शुभारंभ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को काशी पहुंचे और श्री काशी विश्वनाथ धाम में विधि-विधान से बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक एवं विशेष पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना करते हुए भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने काशी के कोतवाल माने जाने वाले बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचकर भी दर्शन-पूजन किया और आरती में शामिल हुए।मुख्यमंत्री ने सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर मंदिर के शिखर को नमन किया और गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की। जलाभिषेक के दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। इसके बाद बाबा कालभैरव मंदिर में भी उन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजा की तथा भैरवाष्टकम् के सस्वर पाठ के बीच आरती उतारी।सावन के पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़श्रावण मास का पहला दिन होने के कारण श्री काशी विश्वनाथ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंगला आरती के बाद से ही दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। गंगा घाटों से लेकर मंदिर परिसर तक हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगाजल और पूजन सामग्री के साथ बाबा का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन की विशेष नजर
सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर, आसपास के प्रमुख मार्गों और घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। बैरिकेडिंग, दर्शन व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष प्रबंध किए गए, ताकि दर्शन सुचारु रूप से संपन्न हो सकें और किसी प्रकार की असुविधा न हो।
शिवभक्ति का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे माह में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिवपूजन का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि देशभर से लाखों श्रद्धालु सावन में काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी ने काशी की आध्यात्मिक आस्था और उत्साह को एक बार फिर जीवंत कर दिया।





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