ज्ञानवापी विवाद में नहीं हुआ समझौता, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजर
वाराणसी :- ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता कोर्ट में सुनवाई आज (यानि मंगलवार) को पूरी हो गई। दोनों पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया है।
चार पत्रावलियों पर ये बातचीत हुई है। चारों पत्रावलियों के पक्षकार आए थे और सभी ने इस मामले में किसी भी प्रकार की मध्यस्थता से इनकार किया और कोर्ट के निर्णय को सर्वमान्य मानने की बात कही।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर बनाम ज्ञानवापी मस्जिद
वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा ऐतिहासिक और कानूनी विवाद है। मंदिर पक्ष का मानना है कि ज्ञानवापी के नीचे आदि-विश्वेश्वर का मंदिर मौजूद है। 1669 में औरंगजेब द्वारा इसे तोड़े जाने के ऐतिहासिक साक्ष्य दिए जाते हैं। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह जमीन सदियों से वक्फ की संपत्ति है और यहां नियमित नमाज होती रही है।
'पूजा स्थल अधिनियम 1991' का हवाला देता है
वह 'पूजा स्थल अधिनियम 1991' का हवाला देता है, जो किसी भी धार्मिक स्थल के 1947 वाले स्वरूप को बदलने से रोकता है। मंदिर पक्ष की मांग पर जिला जज की अदालत ने एएसआई सर्वे कराया, जिसमें मंदिर से जुड़े अवशेष और मूर्तियां मिलने का दावा किया गया है। फिलहाल यह मामला वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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