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    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं- जंतर-मंतर का दृश्य पूरे महिला समाज के लिए शर्मनाक, संस्कार और शिक्षा से बनेगा विकसित भारत

    वाराणसी :- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का सपना तभी साकार होगा, जब देश की नई पीढ़ी शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान और अनुशासित भी होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल जीवन-मूल्य ही समाज और राष्ट्र को सही दिशा देने की शक्ति रखते हैं।

    संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा, कर्तव्य और वसुधैव कुटुंबकम जैसे भारतीय आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने हाल ही में जंतर-मंतर पर सामने आए एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जो दृश्य देखने को मिला, उसने पूरे महिला समाज का सिर शर्म से झुका दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति से ही अच्छे संस्कार जन्म लेते हैं और समाज को सही दिशा मिलती है।

    राज्यपाल ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे वेद, उपनिषद, भगवद्गीता और रामायण जैसे भारतीय ग्रंथों का अध्ययन कर अपने व्यक्तित्व को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्रवान, विवेकशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जा रहा है, ताकि देश की प्राचीन ज्ञान-संपदा नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में पांडुलिपियों के संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और अन्य विकास कार्यों के लिए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयासों की सराहना भी की।

    11,958 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, मुस्लिम छात्राओं ने भी जीते स्वर्ण पदक

    दीक्षांत समारोह में कुल 11,958 विद्यार्थियों को डिजिटल लॉकर के माध्यम से उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को कुल 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 17 छात्रों ने 35 तथा 12 छात्राओं ने 16 स्वर्ण पदक प्राप्त किए।

    सम्मानित विद्यार्थियों में आयुर्वेद संकाय की छात्रा तमन्ना बानो को दो स्वर्ण पदक तथा संस्कृत विद्या संकाय की छात्रा कायनात खानम को एक स्वर्ण पदक मिला। वहीं संस्कृत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के रूसी छात्र कुचुक अर्तेमी वैसीलीविच को कांस्य पदक देकर सम्मानित किया गया।

    मालगाड़ी का इंजन खराब होने से जौनपुर में रुकी राज्यपाल की ट्रेन

    समारोह के बाद राज्यपाल बेगमपुरा एक्सप्रेस से लखनऊ के लिए रवाना हुईं। इसी दौरान वाराणसी-लखनऊ रेलखंड पर बख्शा और सरायहरखू स्टेशनों के बीच एक मालगाड़ी का इंजन खराब हो जाने से रेल यातायात प्रभावित हो गया। इसके चलते बेगमपुरा एक्सप्रेस को करीब 35 मिनट तक जौनपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर रोके रखना पड़ा।

    ट्रेन रुकते ही जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली। रेलवे अधिकारियों ने दूसरा इंजन लगाकर मालगाड़ी को हटाया, जिसके बाद दोपहर 2:35 बजे बेगमपुरा एक्सप्रेस को आगे रवाना किया गया। राज्यपाल को बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय भी जाना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने अपना कार्यक्रम बदलते हुए सीधे लखनऊ लौटने का निर्णय लिया।


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