काशी, मथुरा और संभल केस: सुप्रीम कोर्ट की सुलह की कोशिश क्यों नहीं आई काम? जानिए पूरा मामला
ज्ञानवापी, मथुरा, संभल पर मध्यस्थता की पहल विफल, सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव से हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों ने किया इनकारवाराणसी :- काशी के ज्ञानवापी, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट की पहल पर प्रस्तावित मध्यस्थता और विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया में मुस्लिम पक्ष ने शामिल होने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मामलों का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया से ही होना चाहिए।
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष भी मध्यस्थता को लेकर खास उत्साह नहीं दिखा रहा है। ऐसे में अब तीनों मामलों का अंतिम समाधान अदालत के निर्णय पर ही निर्भर माना जा रहा है।
ज्ञानवापी विवाद क्या है?
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर था, जिसे मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को खारिज करते हुए Places of Worship Act, 1991 का हवाला देता है और मस्जिद के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की बात कहता है।
पिछले वर्षों में एएसआई सर्वे, वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग के दावे और व्यासजी के तहखाने में पूजा की अनुमति जैसे घटनाक्रमों के बाद यह मामला लगातार अदालत में विचाराधीन है।
मथुरा विवाद
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व का विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक जन्मस्थान पर बनी है, जबकि मुस्लिम पक्ष 1968 के समझौते और वर्तमान कानूनी स्थिति का हवाला देता है। यह मामला भी उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
संभल विवाद
संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर भी हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले हरिहर मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई। मुस्लिम पक्ष इस दावे से असहमत है और इसे ऐतिहासिक इबादतगाह बताता है। एएसआई सर्वे और उससे जुड़े घटनाक्रमों के बाद यह विवाद भी न्यायालय में विचाराधीन है।
मध्यस्थता क्यों नहीं हो सकी?
सुप्रीम कोर्ट की पहल पर 'समाधान समारोह-2026' के तहत 21 से 23 अगस्त के बीच विशेष लोक अदालत में आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समाधान केवल अदालत के फैसले से ही होना चाहिए।
दोनों पक्षों के बीच सहमति न बनने के बाद अब काशी, मथुरा और संभल से जुड़े इन महत्वपूर्ण मामलों में सबकी निगाहें न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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