संसद में भगवा वेशभूषा पहनकर प्रदर्शन पर संत समाज नाराज़, महंत राजू दास समेत कई धर्माचार्यों ने जताई आपत्ति
अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि संसद परिसर में जिस तरह भगवा वेशभूषा का इस्तेमाल कर प्रदर्शन किया गया, उससे संत समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों का उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ नेताओं का व्यवहार संतों के प्रति सम्मानजनक नहीं था।
स्वामी दीपांकर बोले— धार्मिक प्रतीकों का सम्मान जरूरी
गाजियाबाद के आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगवा वस्त्र सनातन परंपरा में त्याग और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक प्रदर्शन में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल उचित नहीं है और सभी को आस्था के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए।
साक्षी महाराज ने भी दी प्रतिक्रिया
मथुरा में भी हुआ विरोध प्रदर्शन
मथुरा के गोवर्धन स्थित जुल्हेदी आश्रम में साधु-संतों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान पप्पू यादव के खिलाफ नारेबाजी की गई और पुतला दहन किया गया। चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मामले में कार्रवाई की मांग की। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने भी धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की बात कही।
संत समाज का कहना है कि भगवा वस्त्र केवल एक परिधान नहीं, बल्कि त्याग, तप और सनातन आस्था का प्रतीक है। इसलिए किसी भी राजनीतिक गतिविधि या विरोध प्रदर्शन में इसके उपयोग को लेकर संवेदनशीलता और मर्यादा बनाए रखी जानी चाहिए।

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