विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी विवाद: संत समिति ने मध्यस्थता की बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर जताया भरोसा
वाराणसी :- काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने की पहल पर अखिल भारतीय संत समिति ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। समिति का मानना है कि इतने पुराने और संवेदनशील धार्मिक विवाद का स्थायी समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।समिति के महामंत्री जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि ऐसे मामलों में मध्यस्थता का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन अंतिम और सर्वमान्य समाधान अदालत के फैसले से ही निकलता है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी पहले बातचीत और मध्यस्थता की कोशिश हुई थी, लेकिन अंततः सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही विवाद का समाधान हो सका।
उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी विवाद करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं, इसलिए केवल बातचीत के आधार पर सहमति बनना आसान नहीं माना जा सकता।
जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने यह भी कहा कि यदि मध्यस्थता प्रक्रिया में सभी पक्ष पूरी गंभीरता और सकारात्मक सोच के साथ शामिल नहीं होते, तो किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना मुश्किल होगा। हालांकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का सम्मान करते हुए कहा कि न्यायपालिका जो भी प्रक्रिया अपनाए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीधे फैसला सुनाने के बजाय दोनों पक्षों को बातचीत और लोक अदालत के माध्यम से समाधान तलाशने का सुझाव दिया है। इसी क्रम में विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया प्रस्तावित की गई है, जहां दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, हिंदू और मुस्लिम पक्षों की अलग-अलग राय सामने आने के कारण फिलहाल सर्वसम्मति बनने की संभावना कम नजर आ रही है।

No comments